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Tuesday 19 June 2007

कम्युनिज्म पर डॉ. अंबेडकर के विचार- 4


डॉ. अंबेडकर उन राष्ट्रीय महान पुरूषों में से थे जिन्होंने राष्ट्रीय एकात्मता, भारतीयता, प्रखर राष्ट्रभक्ति तथा भारतीय जनमानस को आगे बढने की प्रेरणा दी।

कम्युनिस्टों ने अपने मकसद में डॉ. अंबेडकर को अवरोध मानते हुए समय-समय पर उनके व्यक्तित्व पर तीखे प्रहार किए। पूना पैक्ट के बाद कम्युनिस्टों ने डा. अंबेडकर पर 'देशद्रोही', 'ब्रिटीश एजेंट', 'दलित हितों के प्रति गद्दारी करनेवाला', 'साम्राज्यवाद से गठजोड़ करनेवाला' आदि तर्कहीन तथा बेबुनियाद आक्षेप लगाए। इतना ही नहीं, डा. अंबेडकर को 'अवसरवादी', 'अलगाववादी' तथा 'ब्रिटीश समर्थक' बताया।

(गैइल ओंबवेडन, 'दलित एंड द डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशन: डॉ. अंबेडकर एंड दी दलित मूवमेंट इन कॉलोनियल इंडिया')

कम्युनिज्म पर डॉ. अंबेडकर के विचार-

'मेरे कम्युनिस्टों से मिलने का प्रश्न ही नहीं उठता। अपने स्वार्थों के लिए मजदूरों का शोषण करनेवाले कम्युनिस्टों का मैं जानी दुश्मन हूं।'

'माक्र्सवाद तथा कम्युनिस्टों ने सभी देशों की धार्मिक व्यवस्थाओं को झकझोर दिया है। माक्र्स और उसके कम्युनिस्ट का पूरा उत्तर बुध्द के विचारों में है। बौध्द धर्म को मानने वाले देश, जो कम्युनिज्म की बात कर रहे हैं, वे नहीं जानते कि कम्युनिज्म क्या है। रूस के प्रकार का जो कम्युनिज्म है, वह रक्त-क्रांति के बाद ही आता है। बुध्द का कम्युनिज्म रक्तहीन क्रांति से आता है। पूर्व के एशियाई देशों को रूस के जाल में फंसने से सावधान रहना चाहिए।'

'संविधान की भर्त्सना ज्यादातर दो हल्कों से है-कम्युनिस्ट पार्टी तथा समाजवादी पार्टी से। वे संविधान को क्यों बुरा कहते हैं। क्या इसलिए कि यह वास्तव में एक बुरा संविधान है। मैं कहना चाहता हूं-नहीं। कम्युनिस्ट चाहते है कि संविधान सर्वहारा की तानाशाही के सिध्दांतों पर आधारित होना चाहिए। वे संविधान की आलोचना इसलिए करते है कि क्योंकि यह संसदीय लोकतंत्र पर आधारित है। समाजवादी दो चीजें चाहते है। प्रथम- यदि वे सत्ता में आएं तो संविधान को बिना किसी क्षतिपूर्ति के व्यक्ति संपत्ति के राष्ट्रीयकरण या समाजीकरण की स्वतंत्रता होनी चाहिए। दूसरे- समाजवादी चाहते है कि संविधान में वर्जित मूल अधिकार पूर्ववत् हों और बिना किसी नियंत्रण के हों, क्योंकि यदि उनकी पार्टी सत्ता में नहीं आई तो उन्हें केवल आलोचनाओं की नहीं, बल्कि राज्य को पलटने की भी हो।'

2 comments:

अनुनाद सिंह said...

कमीनिज्म पर भिन्न भिन्न महापुरुषों के विचार की ये शृंखला बहुत अच्छी लगी। बहुत सी नयी बातें पता चलीं।

मैं चाहूंगा कि इसी तरह साम्यवादी चिन्तन में अनतर्निहित गलत धारणाओं और तार्किक त्रुटियों पर भी विस्तार से लेख प्रकाशित करें।

Shrish said...

कम्युनिज्म जैसे विषय पर विभिन्न महापुरुषों के विचार हम तक पहुँचाकर आप अच्छा कार्य कर रहे हैं,धन्यवाद!