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Friday, 30 November, 2007

नंदीग्राम के मुद्दे पर संसद में श्री लालकृष्ण आडवाणी का ऐतिहासिक भाषण



गत 21 नवंबर को नंदीग्राम के मुद्दे पर लोकसभा में हुई बहस के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी ने सारगर्भित भाषण दिया। प्रस्तुत है संपादित अंश :-

आज प्रात:काल जब मैंने अखबार खोला और देखा कि प्रधान मंत्री ने नन्दीग्राम के बारे में क्या कहा है, तो मुझे लगा कि मैं सबसे पहले उन्हें धन्यवाद देना चाहूंगा, उन्हें बधाई देना चाहूंगा कि विदेश जाते हुए उन्होंने वायुयान से इस प्रश्न के महत्व की ओर पूरे देश का और संसद का ध्यान आकृष्ट किया है। एक प्रकार से उनका यह वक्तव्य इस बात पर भी बल देता है कि इस प्रकार के प्रश्न पर संसद चर्चा करे, यह स्वाभाविक है और जरूरी है।

उन्होंने कहा है कि - “I sincerely hope that the State Government will be able to take necessary steps to restore confidence in the people through the effective deployment of security forces. I understand the spontaneous outpouring of grief and anguish over the issue as expressed by artists and intellectuals in Kolkata. I hope the State Government will take note of this.” मुख्य मंत्री ने एक रिस्पांस भी दिया है, चाहे पार्टी ने कोई और रिस्पांस दिया हो। यहां पर उसकी अभिव्यक्ति हो जायेगी कि जो पार्टी वहां पर शासन कर रही है, वह मुख्य मंत्री के रिस्पांस से संतुष्ट है या पार्टी के प्रवक्ता ने जो बात कही है, उससे संतुष्ट है। लेकिन आपने इस चर्चा के लिए जो गाइडलाइंस अपनी ओर से बताईं, मैं उनका पूरा पालन करने की कोशिश करूंगा।

मैं चाहूंगा कि इस चर्चा का उपयोग केवल एक-दूसरे पर मात्र प्रहार करने के लिए न हो, बल्कि इस प्रकार की स्थिति कहीं पर भी, कभी भी पैदा न हो, इसका क्या प्रबंधा किया जा सकता है, यह एक चिंता की बात है। मैं समझता हूं कि यह नन्दीग्राम में जाने पर सहज रूप से सबको लगे। यह एक साधारण बात नहीं है। वहां की घटना कोई अभी की घटना नहीं है, जो अक्टूबर, नवम्बर में हुई। यह घटना वहां कई महीनों से चल रही है। वहां पर जो भी कुछ घटनाक्रम हुआ है, उसकी शुरूआत वर्ष के आरम्भ में हुई थी और मैं स्वयं मार्च के महीने में वहां गया था और अबकी बार फिर से पिछले सप्ताह गया। दोनों बार की मेरी यात्रा में पूरे एन.डी.ए. की कई पार्टियों के मेरे साथी मेरे साथ गये थे। लेकिन इस बार एक बहुत बड़ा अंतर था कि जब मैं मार्च के महीने में वहां पर गया तो बहुत सारे लोग हमसे आकर मिलते थे, बातें करते थे और खुलकर बताते थे कि क्या हुआ, कैसे हुआ, कैसे हमारे ऊपर अत्याचार हुआ। इस बार एक आतंक का एक ऐसा वातावरण था कि अगर कोई आकर मिलता था तो उसे रोकने वाले उसके परिवार के ही लोग होते थे। मेरे साथ दूसरे सदन से सुशमा जी भी साथ गई थीं तो उनसे जब महिलाएं मिलती थीं और बलात्कार की चर्चा करती थीं तो एक महिला को उसके घर का लड़का उठाकर ले गया कि ऐसा क्यों करती हो?

अपना नाम मत बताना, किसी टी.वी. वाले को या किसी प्रैस वाले को अपना फोटो मत लेने देना। यह जो आतंक का वातावरण इस बार मैंने देखा, उसके कारण मुझे लगा कि इस बार का मामला बहुत गंभीर हो गया है। कैसे हुआ है, उसका थोड़ा सा उल्लेख मैं करूंगा। मैंने जैसा कहा कि मैं नहीं चाहता हूं कि यह केवल एक-दूसरे को दोष देने का एक प्रकरण बन जाए। यहां तक कि मैं अपने साथियों को भी कहूंगा। मुझे आकर वामपंथी पार्टी के कई लोग कहते हैं कि आप लेफ्ट मत कहिए। आप सीपीएम का नाम लीजिए। आप लेफ्ट मत कहिए। मुझे ऐसा कहने वाले इस लेफ्ट एलायंस के अलग-अलग पार्टियों के लोग हैं।

मैं इस बात पर आता हूं कि मैं जहां प्रधाान मंत्री जी के वक्तव्य का स्वागत करता हूं वहीं मैं इस बात का भी जिक्र करूंगा कि पहले दिन से लेकर यानी परसों का जो दिन था, सोमवार के दिन यहां सेन्ट्रल हॉल में श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्मदिन के अवसर पर उन्हें पुष्प अर्पित करने के लिए हम सब लोग एकत्रित हुए थे और सदन के नेता से तब मेरी पहली बात हुई। मैंने कहा कि नंदीग्राम के संदर्भ में एनडीए ने तय किया है कि हम एक स्थगन प्रस्ताव देंगे जो कि हमने दिया और अध्यक्ष जी ने स्वयं कहा था कि स्थगन प्रस्ताव तो हो सकता है in respect of the failure of the Central Government, it cannot be in respect of the failure of a State Government. मैंने कहा कि सही बात है और उसकी ड्राफ्टिंग मैंने उसी हिसाब से करके अध्यक्ष जी को दिया था। मैं नहीं जानता हूं कि वह एडमिट होगा या नहीं होगा। उस पर सदन में कितने लोग समर्थन में खड़े होंगे कि नहीं होंगे। लेकिन मैंने अपने सहयोगी मल्होत्रा जी को यह भी कहा कि आप अध्यक्ष जी को यह भी बता दें कि हमारा कोई विधा पर आग्रह नहीं है। डिवाइस एडजर्नमेंट मोशन हो, इस पर आग्रह नहीं है। हमारा इस बात पर आग्रह है कि नंदीग्राम की चर्चा सदन में जरूर होनी चाहिए। वह चाहे किसी रूप में हो।

मुझे इस बात का संतोष है कि कल और परसों जो गतिरोधा उत्पन्न हुआ, वह गतिरोधा अब समाप्त हो गया है और इस विशय पर मैं चर्चा शुरु कर रहा हूं।

अधयक्ष महोदय, मैं ऑॅब्वियसली यह कहूंगा कि जो बात कही गई कि किसी सूरत में इस चर्चा के लिये नन्दीग्राम नाम नहीं आयेगा, तब मैंने कहा कि अगर किसी सूरत में नन्दीग्राम नाम नहीं आयेगा तो गतिरोधा किसी सूरत में समाप्त नहीं होगा। मुझे खुशी है कि नन्दीग्राम का नाम इसमें आया है, चाहे जिस ढंग से आया हो। would have liked it to be different. We are not discussing only SEZs. What has happened in Nandigram goes far beyond the issue or different view points on the question of SEZ. हम लोग SEZs पर डिसकशन कर चुके हैं लेकिन पार्लियामेंट में डिसकस हो, इसलिये कोई न कोई ऐसा पहलू हो चाहे सीआरपीएफ लायें, चाहे SEZs लाया जाये या कोशिश यह हुई कि नन्दीग्राम का उल्लेख किये बिना, चाहे देशभर में नक्सलवाद की समस्या हो, देश में फार्मर्स की समस्या हो, तब मैने कहा कि अगर ऐसा करना हो तो गतिरोधा समाप्त करने का यह कोई तरीका नहीं है। मुझे इसलिये खुशी है कि जिस-जिस ने इस ड्राफ्ट को बनाने में योगदान दिया, मैं उन सब के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूं।

अगर इस सदन में नन्दीग्राम पर चर्चा नहीं होती तो न केवल नन्दीग्राम में, न केवल पश्चिमी बंगाल में लेकिन देश के बहुत सारे भागों में बहुत लोगों में यह भावना होती कि नन्दीग्राम जैसा बड़ा कांड हो और संसद में उस पर चर्चा न हो। They do not understand the rules. But the fact is that if this discussion had not taken place, it would have lowered the Parliament in the esteem of the people of the country. इसलिये संसद के सम्मान के लिये आवश्यक है कि यदि इस प्रकार की घटनायें कहीं भी हो, उन पर चर्चा जरूर होनी चाहिये और उस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिये। यह कोई न कहे कि NANDIGRAM शब्द उस में नहीं होगा और यहां कहा गया कि अगर यह शब्द होगा तो हम मोशन स्वीकार नहीं करेंगे।

मैं इतना कहूंगा कि यह सदन सत्य तक पहुंचना चाहेगा और हमारे यहां सत्य को 'शिव' कहते हैं। और शिव तक पहुंचने के लिये नन्दी को पार करना ही पड़ता है।

चाहे अयोधया की समस्या हो, चाहे गोधारा की समस्या हो, चाहे गुजरात के दंगे हों, यहां सदन से ऑल पार्टी डेलीगेशन भेजे गये हैं। 1984 के दंगों में वहां जाने की जरूरत नहीं पड़ी लेकिन इन तीन स्थानों के लिये ऑल पार्टी डेलीगेशन गये थे। इसलिये मेरा सुझाव होगा जो आखिर में रिपीट करूंगा कि इस बार नन्दीग्राम के बारे में पूरी सच्चाई जानने के लिये एक ऑल पार्टी डेलीगेशन जाना चाहिये।

जब वहां पर गए तो वहां पर एक हायर सैकेन्ड्री स्कूल है जिसको रिफ्यूजी कैम्प में कनवर्ट कर दिया गया था। गांव बिल्कुल सुनसान थे। They were deserted. Some elderly people were living there. उनसे मिलकर जितना उनसे पता लगता था, वे बताते थे। वे कहते थे कि लोग डर के मारे भाग गए हैं और बहुत सारे हमारे लोग नन्दीग्राम टाउन में रिफ्यूजी कैम्प में हैं। वहां रिफ्यूजी कैम्प में हम गए। वहां सबसे पहले लोगों ने देखा कि संसद के सदस्य आए हैं तो भागकर कई महिलाएँ एक साथ आईं, आठ-दस होंगी, पैर पकड़कर रोने लगीं कि हमें तो खाली इतना पता लगे कि हमारे पति जीवित हैं या नहीं। हम खाली यह जानना चाहते हैं कि हमारे पति जीवित हैं या नहीं। It was such a spectacle that I felt literally miserable.… (Interruptions)

मैंने कहा कि मैं आया हूँ। फिर उन्होंने उसी समय एक इंप्रॉम्प्टू सा मंच लगाकर कहा कि आप बोलिए। कोई माइक्रोफोन ले आए। मैं उस पर बोला। It became the public meeting. But it was there that I promised them that with these happenings, I can tell them that I have come on behalf, as a Member of Parliament along with my other colleagues. We are certainly going to raise this matter in Parliament and talk about it; and through Parliament, tell the State Government that it is their duty to ensure that these queries whether their husband is alive or not, is he there or not, these should be properly tackled and answered. It happens that in the meanwhile, other things have happened. मैं आज इस बात को स्वीकार करूंगा कि साधारणत: इस संसद में कोई राज्य के मामले डिसकस नहीं होते। अगर कोई साधारण लॉ एंड ऑर्डर का राज्य का मामला माना जाए तो फिर डिसकसषन जस्टिफाइड नहीं है। लेकिन क्यों जस्टिफाइड हुआ, मैं इसका ज़िक्र करना चाहूंगा जिसके कारण प्रधान मंत्री को भी कहना पड़ा कि संसद में चर्चा होनी चाहिए। उसमें ज़िक्र है, मैंने क्वोट नहीं किया। लेकिन पहले जब मैंने गवर्नर का स्टेटमैंट देखा तो मैं तो चकित हो गया।

According to Shri Ashok Mitra, when he consented to become the Governor, he wanted that the leadership of the CPI(M) should be prepared to have him. He has now become the enemy. This is the word that has been used… (Interruptions)

Sir, there are three statements from various dignitary ies. One is, of course, the Governor’s statement. I am not quoting him. He said that the happenings in Nandigram are totally unlawful and unacceptable. Then, the second one is the judgment of the High Court of Kolkata, which goes on to say that the firing took place on 14th March – this judgment has come last week – is unconstitutional and unjustified. What it has said in the body of the judgment, I do not want to quote. The third statement is this. When the CRPF has been invited to help in Nandigram, it was said that हमारी जवाबदारी पूरी हो जाएगी, वे नंदीग्राम संभाल लेंगे। According to the CPI(M) there, it was the Maoists who are indulging in violence, though the Home Secretary of West Bengal came out with a statement that there is no Maoist, there is no Maoist literally there. … (Interruptions)

Sir, the DIG of the CRPF says that he has been given one week now. Sir, he has publicly said: “I have been called here; I have been invited here; I have been asked to deal with the situation in the Nandigram, whereas I am getting no cooperation from the State Government, from the State Police Authorities”.… (Interruptions)
Sir, if I were to quote, he said: “I asked the SP two days ago to provide me a list of wanted criminals, but I did not get it. I do not know why he is doing it. I have worked as an SP, and I have never seen such a behaviour.” These are the words of the CRPF officer... (Interruptions)

हाईकोर्ट इसे अनकाँस्टीटयुशनल कहता हैए गवर्नर जिसे टोटली अनलॉफुल कहता है और सी.आर.पी.एफ, जिसे स्टेट गवर्नमेंट ने रिक्वैस्ट कर के केन्द्रीय होम मिनिस्ट्री से मंगवायाए उस सी.आर.पी.एफ. का हैड कहता है कि यहां पर मुझे कोई कोआपरेशन नहीं मिलता। क्या यह गम्भीर स्थिति नहीं हैए जिस पर संसद को विचार करना चाहिए? Sir, I visited Nandigram, and many of the Press people, Media people accompanying me said that ‘this is the first time that we have been allowed to go to Nandigram. Otherwise, it was out of bounds for us.’ I was surprised to hear that ‘this is because Advani has friendship with the Chief Minister.’ This kind of a comment coming from the Ruling party surprised me. I did not expect this because I have had and I have tried, as the Home Minister, to maintain good relations with all the Chief Ministers in the country including many in the Congress party. That does not matter anything. I have good relations with them. Even now, I have good relations with him also. And, I was happy to find that his response to the Prime Minister’s comment on Nandigram was different from the party’s response. He said: “I appreciate what the Prime Minister has said.”

So, these are matters about which I have only this to say that the CPI(M) must look back at the entire Nandigram episode. How it happened? When you try to convert the party into a substitute for Government, then things go out of hand. I remember, when I first visited Nandigram, the same thing was again and again mentioned that it is his people who wore police uniforms. I do not know.
An MP’s name was mentioned. It was said – ‘It is they who fired on us while we were doing Puja. The Muslim ladies there were reciting Quran’ At that time, firing took place on them and they said that they were not policemen really, they were party men, party cadres in police uniform. … (Interruptions)
Sir, the High Court says in its operative part : “The action of the police department to open fire at Nandigram on 14th March, 2007 was wholly unconstitutional and can not be justified under any provision of the law”.

Now, a statement of this kind, the statement given by the Governor of West Bengal and lastly the statement made by the DIG, CRPF are there. I said to the Governor when I met him along with my colleagues that : “Is this not sufficient reason why you should send a formal report to the Central Government as to what has happened in Nandigram. You have your inputs on the basis of which you have yourself said.” In fact, this is not the first time that he said it. He said it for the first time in March itself, that “I have a feeling of cold horror”. These are the words that he used on visiting Nandigram, a feeling of ‘cold horror’.

He said : “This time, the Diwali all over the State has been dampened because of Nandigram incidents”. I said : “You owe it to the Central Government and to the country to send a detailed report to the Central Government as to what are your inputs which have made you to make this public statement and on the basis of that you can recommend that in this situation, the Constitution empowers the Central Government to issue directions to the State Government under Article 355 and if those directions are not followed to correct the situation in Nandigram, then the Central Government is fully justified in invoking Article 356”. … (Interruptions)

Sir, this was something that I said to the Governor which I am repeating here in Parliament. The hon. Minister of Home Affairs is here. I would like to urge him to consider this that the situation should be improved. What is happening there? The Governor said ‘I am in touch with the Central Government.’ … (Interruptions)

अधयक्ष महोदय, जहां के चीफ मिनिस्टर कहते हैं कि “We have paid them back in their own coin.” आप इतिहास देखिए, जब मैं पार्लियामेन्ट में पहली बार आया था, तब मार्क्सिस्ट मुझे कहते थे कि आज हमारा यूरोप पर साम्राज्य है और एक समय आएगा जब जिस प्रकार से ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्यास्त नहीं होता। कम्युनिस्ट साम्राज्य भी ऐसा होगा, जिस में कभी सूर्यास्त नहीं होगा। और देखिये, क्या-क्या हो गया। आज वह दुनिया भर से समाप्त हो गया।

सी.पी.एस.यू. की जो 20वीं कांग्रेस थी, जिसमें ख्रुश्चेव ने वह भाषण किया था, लाइव बस्टिंग हार्ड, याद करो कि कैसे सोवियत संघ में आपका साम्राज्य खत्म हुआ।

अधयक्ष जी, मैं इसी संसद में था और संसदीय शिष्टमंडल में ढिल्लों साहब हमारे स्पीकर थे, उनके नेतृत्व में मैं 1972 में चैकोस्लवाकिया गया था और चैकोस्लवाकिया में जिस प्रकार का एग्रेशन मास्को का हुआ था और डुबचैक का काण्ड हुआ था, उसके कारण वहां समाप्ति हो गई। हमारी हिस्ट्री में ये टर्निंग पाइंटस हैं और मुझे लगता है कि जिस प्रकार के टर्निंग पाइंटस इन सब बातों से आये हैं, चाहे डुबचैक का प्रकरण हो, चाहे ख्रुश्चेव का भाषण हो, चाहे चाइना में थियानानमन स्क्वायर हो, Nandigram is going to be the turning point in the history of the Communist Party of India. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के इतिहास में यह एक टर्निंग पाइंट बनेगा। अब 3-4 टापू बच गये हैं।

मैं फिर से कहूंगा कि नंदीग्राम के बारे में संसद को अधिाकृत जानकारी मिले, सरकार को भी अधिकृत जानकारी मिले, इस दृष्टि से पहले-पहल तो एक ऑल पार्टी डैलीगेशन यहां से नंदीग्राम भेजा जाना चाहिए और फिर इनको मैं यह कहूंगा कि इस बीच में सरकार इस पर विचार करे कि वह इस मामले में क्या कर सकती है। खासकर हाई कोर्ट ने जो निर्देश दिये हैं, जो मर गये हैं, उनको मुआवजा देना, जिनका बलात्कार हुआ है, उन महिलाओं को न्याय देना, ये सब जितने निर्देश दिये हैं, उन सब का भी पालन हो और साथ-साथ राज्यपाल को यहां बुलाकर उनसे प्रत्यक्ष पूरी जानकारी प्राप्त कर केन्द्रीय सरकार भी आवश्यक कार्रवाई करे।

मैं समझता हूं कि इसके आधार पर आप आर्टीकल 355 का पहले उपयोग करके फिर यदि उसका भी वे लोग पालन नहीं करते हैं तो आर्टीकल 356 का उपयोग करे।

1 comment:

संजय तिवारी said...

आडवाणी कमजोर नेता प्रतिपक्ष है. यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि अटल जी जैसा नेतृत्व दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है.