हितचिन्‍तक- लोकतंत्र एवं राष्‍ट्रवाद की रक्षा में। आपका हार्दिक अभिनन्‍दन है। राष्ट्रभक्ति का ज्वार न रुकता - आए जिस-जिस में हिम्मत हो

Monday, 29 December, 2008

माकपा सांसद ने मोदी मॉडल की प्रशंसा की


सत्‍य को झूठ रूपी बादल चाहे जितना ढंकने की कोशिश करे, कुछ देर के लिए वह ओझल होता है किन्‍तु सत्‍य तो प्रकट होता ही हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्‍यक्तित्‍व पर वामपंथियों ने जबरदस्‍त कीचड उछालने का षड्यंत्र रचा, लेकिन श्री मोदी तो सूर्य की तरह हमेशा चमकते रहे वहीं वामपंथियों के हाथ कीचड में जरूर सने रहे। जनता ने दो बार श्री मोदी को प्रचंड बहुमत से गुजरात के मुख्‍यमंत्री होने का जनादेश सुनाया लेकिन जनता के तथाकथित ठेकेदार श्री मोदी को पानी पी पीकर गरियाने में जुटे रहे, उन्‍हें जनतंत्र विरोधी करार देते रहे। अब श्री मोदी के विरोधी भी स्‍वीकार कर रहे हैं कि श्री मोदी ने अपनी मेहनत, ईमानदारी एवं सूझबूझ से गुजरात को देश का अग्रणी राज्य बना दिया है। उनका काम सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर भी दिखता है।


गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रशंसकों की लंबी फेरहिस्‍त बन रही हैं। आज के दैनिक अंग्रेजी अखबार पायोनियर में एक खबर प्रकाशित हुई हैं, जिसके मुताबिक केरल के कन्‍नूर से माकपा सांसद श्री अब्‍दुल्‍लाकुटटी गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को विकास के मामले में मॉडल मानते हैं।
श्री अब्‍दुल्‍लाकुटटी का मानना है कि विकास के मामले में नरेन्‍द्र मोदी अपनी प्रभावी योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के चलते अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात को काफी आगे ले गए हैं।

श्री अब्‍दुल्‍लाकुटटी ने आगे कहा, "कैसे मोदी नैनो कार परियोजना को पश्चिम बंगाल (मार्क्सवादियों द्वारा शासित राज्य) से गुजरात वापस लाने में टाटा समूह को आकर्षित किया, यह इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसलिये केरल को उनसे सबक लेना चाहिए।"

श्री अब्‍दुल्‍लाकुटटी ने केरल की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा, "केरल निवेशकों को आकर्षित करने में अन्य राज्यों से काफी पीछे है। इसके पीछे बेवजह हडताल, बुनियादी सुविधाओं का अभाव, विकास की गलत नीतियों जैसे कुछ कारण हैं। पर नरेंद्र मोदी निवेशकों को आकर्षित करने और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्‍ध कराने में अन्य राज्यों से काफी आगे में है। "

3 comments:

आशीष कुमार 'अंशु' said...

क्या खबर लाए...वाह

संजय बेंगाणी said...

खबर की छोड़ो, यह बताओ कम्युनिस्ट कब से पूजा पाठ नमाज वगेरे करने लगे? या अब धर्म अफिम नहीं रहा? :)

तस्वीर में एम पी साहब क्या कर रहें है?

मिहिरभोज said...

संजय भाई ये वे ही अब्दुल्ला कुट्टी जी हैं जो कुछ समय पहले सांस्क्रितिक आदान प्रदान के तहत मक्का मदीना जा कर आये हैं(हज करने नहीं गये थे...ऐसा इनकी पार्टी ने कहा है)....खैर इनकी स्वीकारोक्ति निश्चित ही प्रशंसनीय है..