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Tuesday, 5 February, 2008

अल्पसंख्यक कल्याण में गुजरात आगे

पिछले दो दशकों का सबसे बडा झूठ है भारतीय जनता पार्टी पर सांप्रदायिकता का ठप्‍पा लगाना। गोयबल्‍स के अनुयायियों ने देशवासियों को गुमराह करते हुए भाजपा की सांप्रदायिक छवि बनाने में आंशिक सफलता प्राप्‍त की। य‍ह अजीब विडंबना है कि जो दल मुसलमानों को वोट-बैंक के रूप में इस्‍तेमाल करता है वह धर्मनिरपेक्ष है और जो दल मुसलमानों को एक नागरिक के तौर पर देखता है उसे सांप्रदायिक कहा जाता है। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल किसान, मजदूर और गरीबों के विकास को लेकर नहीं अपितु मुस्लिमों को लेकर ज्‍यादा चिंतित नजर आ रहे है।‍ उनका य‍ह रवैया देश में विभाजनकारी मानसिकता को बढावा दे रहा है। उत्‍तर प्रदेश की मुख्‍यमंत्री मायावती और तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री करूणानिधि मजहबी आधार पर मुस्लिमों और ईसाइयों को नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में आरक्षण देने की मांग कर रहे है। केंद्र सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा और इसमें मुसलमानों को विशेष आरक्षण देने की मांग पर अडी हुई है। कांग्रेस की आंध्र प्रदेश सरकार ने मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत कोटा देना शुरू कर दिया है। बिहार विधानसभा चुनाव के समय लोजपा नेता श्री रामविलास पासवान ने मुसलमानों के लिए 16.6 प्रतिशत आरक्षण की मांग की, इसके साथ ही श्री पासवान और राजद नेता श्री लालू प्रसाद यादव ने कुख्‍यात आतंकवादी बिन लादेन के हमशक्‍ल मुस्लिम को साथ लेकर चुनाव-प्रचार किया। सच्‍चर समिति ने पोल खोला कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की स्थिति दयनीय है। माकपा ने केरल में मुस्लिम बहुल जिला मल्‍लापुरम बनाया। अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्री अंतुले ने घोषणा की है कि शिनाख्‍त किए गए 90 अल्‍पसंख्‍यक बहुल जिले जो विकासात्‍मक मानदंडों पर पिछडे है उनमें मूल सुविधाओं और आर्थिक सुविधाओं में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए जाने का प्रस्‍ताव है। शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस ने मुस्लिम कटटरपंथियों के समक्ष घुटने टेकते हुए संविधान का अपमान किया। संसद पर हमले के साजिशकर्ता आतंकवादी अफजल को बचाने के लिए छद्मधर्मनिरपेक्ष दल क्रांति कर रहे है। हद तो तब हो गई जब प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने राष्‍ट्रीय विकास परिषद की बैठक में कहा कि देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार है।

भाजपा राष्‍ट्रवादी राजनीतिक दल है। सबको न्‍याय, तुष्टिकरण किसी का नहीं इस अवधारणा में यह पार्टी विश्‍वास करती है। भाजपा मुसलमानों को वोट-बैंक के तौर पर नहीं बल्कि नागरिक के रूप में देखती है। इसलिए नरेंद्रभाई मोदी गुजरात में साढे पांच करोड गुजरातवासियों के विकास की बात करते है और इसे साकार कर भी दिखाते है।

आज के दैनिक जागरण में यह खबर छपी है कि भाजपा शासित प्रदेश अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण के मामले में अन्‍य राज्‍यों से आगे है।


नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। गुजरात दंगों का दाग मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का पीछा भले न छोड़ता हो, लेकिन नतीजों के आईने में देखें तो अल्पसंख्यकों के लिए वे कहीं बेहतर काम जरूर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती भी इस मोर्चे पर अच्छी साबित हो रहीं हैं। अलबत्ता अल्पसंख्यकों की भलाई का नारा जोर-शोर से लगाने वाले वामदलों का पश्चिम बंगाल और कांग्रेस शासित दिल्ली व जम्मू-कश्मीर की सरकारें प्रधानमंत्री की ओर से तय अल्पसंख्यक तरक्की के मानकों पर कतई खरी नहीं उतर पा रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 15 सूत्री कार्यक्रम की जमीनी सच्चाई ने कई राज्यों की कलई खोल दी है। बीते साल दिसंबर तक की प्रगति की समीक्षा में पता चला कि सिर्फ 50 जिले ही भौतिक कार्र्यो को कराने और धन खर्च करने के मामले में 50 प्रतिशत से अधिक सफलता हासिल कर सके हैं। कार्य के लिहाज से राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा गया, जिसमें 50 प्रतिशत से ऊपर नतीजों वाले राज्यों को अच्छा माना गया, जिसमें भाजपा शासित नरेंद्र मोदी के गुजरात और बसपा शासित मायावती के उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा और तमिलनाडु शामिल हैं।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, असम, केरल और नगालैंड जैसे राज्यों ने अल्पसंख्यकों के लिए तय विभिन्न कार्यक्रमों में 30 से 50 प्रतिशत के बीच ही परिणाम दिए। वामदल शासित पश्चिम बंगाल और कांग्रेस शासित दिल्ली और जम्मू-कश्मीर ने सबसे ज्यादा खराब प्रदर्शन किया। इन राज्यों ने अल्पसंख्यकों की बेहतरी के लिए तय कार्यों में से 30 प्रतिशत से भी कम नतीजे दिए। गोवा, पंजाब, चंडीगढ़ समेत कई दूसरे राज्य भी इसी श्रेणी में शामिल हैं।

गौरतलब है, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अल्पसंख्यकों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए 2006 में 15 सूत्री कार्यक्रम घोषित किया था। इसके तहत अल्पसंख्यक कल्याण, मानव संसाधन विकास, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विकास, गृह, श्रम एवं रोजगार, वित्त, शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अल्पसंख्यकों के विकास पर खास फोकस करना है।

3 comments:

Nation First said...

भाई संजीव जी ,
आपको बहुत बहुत धन्यवाद .
आपने जो कोशिश की है उसका कोई जबाब नही.लगे रहिये . एक न एक दिन मंजिल जरुर मिलेगी. इन् यथाकथित छद्म धर्मनिरपेक्ष लोगो को समझ मी आएगा की जो वो बरसों से कर रहे है वो ग़लत है. इन लोगो को बेनकाब करना बुत जरुरी है.
आपका हितैषी ,
धनंजय शुक्ल

संजीव कुमार सिन्हा said...

धनंजयजी सादर नमस्‍कार।
अचानक आपको ब्‍लॉग पर देखकर मन प्रसन्‍न हो गया। आप बिलकुल सही कह रहे है हमलोगों को अपने स्‍तर पर राष्‍ट्रधर्म निभाते रहना चाहिए। राष्‍ट्रवादी विचारधारा तमाम झंझावातों के वावजूद आगे बढ रहा है। गुजरात की जनता ने छद्म धर्मनिरपेक्ष लोगों को सबक सिखा दिया है।

suresh goyal said...

sanjiv kumar sinha ji vastav me apne rastar vadi vichar dhara ko lekar apni jo kalam uthai ha vastav me ap badhai ke patar ha desh ka jo upkar ap apni lekhni duvara kar rha ha bahut hi unukarnia ha hamara rashtar ek din jarur jagega