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Thursday 25 December 2008

भारतीय राजनीति के अटल गौरव


लेखक- प्रभात झा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आज 84 वर्ष के हो गये। वे अब प्रवास नहीं करते हैं पर जन-जन के मानस पटल पर उनके अतीत की स्मृतियों की मौजूदगी स्वत: देखी जा सकती हैं। कुछ वर्षों से अटलजी न सामान्य सभाओं में आते है न चुनावी सभाओं पर ऐसी कोई चुनावी सभाएं नहीं हो रही, जिसमें अटलजी की चर्चा न होती हो। राजनैतिक जीवन में व्यक्तित्व का यह श्रेष्ठतम स्वरूप किसी अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं में देखने को नहीं मिल रहा है। अटलजी पर न केवल भाजपा, न केवल भारत की जनता अपितु विश्व के श्रेष्ठतम लोगों को भी अभिमान होता है। हाल ही में अटलजी से दो बार भेंट करने का मौका मिला। पहली बार जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज जी के साथ गए तो उन्होंने पहले शिवराजजी की सारी बातें सुनी। शिवराज जी ने मध्यप्रदेश की राजनैतिक स्थितियों का वर्णन उनके सामने रखा। अटलजी ने सबको सुना, सबको आशीर्वाद दिया। अटलजी ने शिवराजजी से कहा- ''जीतकर आइए लड्डू खिलाऊंगा।'' उनकी वाणी में ओज था। शब्द कंपित निकल रहे थे पर प्रेरणास्पद थे। शिवराजजी जब बाहर आए तो उन्होंने कहा, कि अब हम फिर अटलजी के पास आएंगे और सच में विजयी लड्डू खाएंगे। जब मैं अटलजी के पास बैठा था तो मैंने जो विज्ञान में पढ़ा था कि ऊर्जा संचरित होती है उसे मैं साफ महसूस कर रहा था। सभी अर्जित होकर वहां से बाहर निकले।

भारत में विरले ही व्यक्तित्व ऐसे होंगे, जो स्वत: सक्रिय राजनीति से दूर रहने की घोषणा के बाद भी लोगों के मन में इतनी जगह बनाए हुए हैं।

दूसरी बार जब 8 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के परिणाम आए। उसके बाद शिवराजजी के साथ अटलजी से पुन: मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। शिवराजजी ने हंसते हुए अटलजी से कहा, ''अटलजी हम नरेन्द्र सिंह जी, प्रभात जी झा आपसे विजयी लड्डू खाने आएं हैं।'' अटलजी ठहाका लगाकर हंसने लगे। उन्होंने कहा, ''लड्डू लाओ इनको खिलाओ।'' छोटे को बड़ा होते देख अटलजी के चेहरे पर जो खुशी छाई थी उसे कोई भी पढ़ सकता था। वे आह्लादित थे। शिवराजजी ने कहा कि जब मैं आधा लड्डू खिलाउंगा तो अटलजी ने कहा, ''मैं पूरा लड्डू खाऊंगा, आधा क्यों?'' अटलजी आज भी अपनी संरक्षक की भूमिका से लोगों के मनों पर अमिट छाप छोड़ रहे हैं।

गांव के चौपालों पर, देश के छोटे-बड़े सदनों में साथ ही भारत के सबसे बड़े पंचायत, संसद के सेंट्रल हॉल में समय-समय पर हर दल के नेता अटलजी की चर्चा करते हैं। चर्चा सकारात्मक संदर्भों में होती है। लोग गर्व से कहते हैं कि अटलजी एक अपराजेय राजनीतिज्ञ का जीवन जी रहे हैं। उन्होंने राजनीति में समय का सदैव ध्यान रखा। उनका बेमिसाल राजनीतिक जीवन, उनकी कार्यपध्दति, नैतिकता, प्रामाणिकता, वाक्पटुता, भाषण, ठहाके, उनके द्वारा ली गयी चुटकियां, कहीं न कहीं सभी की चर्चाओं में आता ही रहता है। वे विरोध में रहते हुए सत्ता पर भारी रहते थे। सदन में उनकी उपस्थिति बिना कुछ कहते सब कुछ कहती थी। आज अटलजी की मौजूदगी न केवल भाजपा बल्कि भारत के लिए गौरव की बात है। उनकी स्मरण शक्ति आज भी तीक्ष्ण है। देश की राजनीति पर उनकी पैनी निगाह बनी हुई है। वो हर खबरों से वाकिफ रहते हैं। वे राजनीति के प्रति सदैव ईमानदार रहे। वे दायित्वों के प्रति ईमानदार रहे। वे जीवन के प्रति ईमानदार रहे। पिछले विधानसभा चुनाव में 'एलईडी वेहिकल' पर अटलजी पर केन्द्रित पिक्चराइज्ड वीडियो फिल्म गांव-गांव में दिखाई गयी। इस तरह की गाड़ी जहां रुकती थी और जैसे ही एलईडी बाहर निकलता था और अटलजी अपनी भावभंगिमापूर्ण से ओत-प्रोत भाषण देते हुए दिखते थे लोग स्वत: ताली बजाते थे। अटलजी की वीडियो उपस्थिति भी लोगों के मन को झकझोर रही थी। जब उस पर बंबई अधिवेशन का चित्र आता है और अटल जी सन् 1980 में संपन्न हुये बंबई अधिवेशन में यह कहते हुए दिखते थे कि ''अंधियारा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा'', लोग स्वत: बेतहाशा झूमने लगते थे। भारत में विरले ही व्यक्तित्व ऐसे होंगे, जो स्वत: सक्रिय राजनीति से दूर रहने की घोषणा के बाद भी लोगों के मन में इतनी जगह बनाए हुए हैं।
(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय सचिव व सांसद हैं)

5 comments:

वेद रत्न शुक्ल said...

भारतीय राजनीति के शीर्ष पुरुष अटल जी को सादर प्रणाम। भगवान उन्हें लम्बी आयु और उत्तम स्वास्थ्य दें।

मिहिरभोज said...

अटल जी को बधाी

विचार-मंथन said...

भारतीय राजनीति को नई दिशा देने वाले जन-जन के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी को हार्दिक शुभकामनाएं।

Satyajeetprakash said...

आशीष दो हे युग-पुरूष, बढ़ाऊं राष्ट्र का मान।
कण-कण माटी देह का, करे राष्ट्र निर्माण।।

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

अटल जी एक महामानव, एक राज ऋषि , एक युग परिवर्तक ,एक कवि और एक ऐसे परिवार के मुखिया जो उनकी गौरव शाली परम्परा को बचा नही पा रहा को जन्मदिन की शुभकामना