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Saturday, 6 December, 2008

'अयोध्या डाट काम'


तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरण तथा व्यावहारिक सरोकारों के इस दौर में कई ऐसे मुद्दे होते हैं जिन्हें हम गहराई से जानना-समझना चाहते हैं परन्तु प्रतिदिन की व्यस्तता के कारण हम बहुत कम या फिर आधी-अधूरी जानकारी लेकर रह जाते हैं। पर सूचना प्रौद्योगिकी के आधुनिक आविष्कारों ने एक ओर दूरियां घटाईं, समय बचाया तो दूसरी ओर अंतरताने की दुनिया में अंत:क्षेत्रों के माध्यम से बहुचर्चित घटनाक्रमों, चाहे वे राष्ट्रीय हों या अंतरराष्ट्रीय, से हमें अवगत कराया। किसी एक विषय को लेकर उसके हर पहलू से अवगत कराने वाले अंत:क्षेत्र हर अच्छी वस्तु की तरह कम होते हैं।

'अयोध्या डाट काम' एक ऐसा अंत:क्षेत्र है जो श्रीराम जन्मभूमि और उससे जुड़े विभिन्न आयामों की सम्पूर्ण जानकारी देता है। अयोध्या मामले की प्रामाणिक और सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने की दृष्टि से 'अयोध्या डाट काम' महत्वपूर्ण है।
इसमें न केवल अयोध्या विवाद का विवरण है, बल्कि इस रामनगरी के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की भी विस्तृत जानकारी है। अयोध्या मंदिरों की नगरी है। यहां के कुछ महत्वपूर्ण मंदिरों की आकर्षक चित्रों सहित झांकी 'अयोध्या डाट काम' के चित्र दीर्घा (फोटो गैलरी) में देखी जा सकती है। इस अंत:क्षेत्र में अयोध्या से जुड़ी प्रत्येक ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक या फिर नीतिगत जानकारी प्रामाणिक तथ्यों सहित दी गई है।

इस अंत:क्षेत्र का निर्माण करने वालों का विश्वास है कि 'अयोध्या डाट काम' में दी गई जानकारी अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाएगी। इसमें सशंकित मन से तथा विश्वस्त भाव से इसका उपयोग करने वाले-दोनों तरह के व्यक्ति शामिल होंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात लेखकों तथा विद्वानों -डा. एन.एस. राजाराम, डा. डेविड फ्राली, कोनराड एल्स्ट तथा फ्रास्वां गोतिए द्वारा अयोध्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर लिखे गए लेख 'अयोध्या डाट काम' में शामिल किए गए हैं।

लेखों के अतिरिक्त इसमें प्रसिध्द पुस्तकों की समीक्षा तथा विवेचना दी गई है। इन पुस्तकों में 'बाबरनामा', 'अयोध्या एण्ड आफ्टर', 'रामायण', 'सीता शक्ति काव्य' आदि हैं।
भगवान राम से जुड़े त्योहारों रामनवमी, दीपावली, दशहरा आदि का राम के जीवन से सम्बंध तथा उनके सूक्ष्म भाव का पूरा ब्यौरा भी दिया गया है।

इस अंत:क्षेत्र में अयोध्या मुद्दे पर जनमत सर्वेक्षण रपट भी हैं। साथ ही एक ओर 'अयोध्या फोरम' के अंतर्गत अंत:क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं के विचार मांगे गए हैं तो दूसरी ओर 'फैक्ट्स आन अयोध्या' स्तंभ के अंतर्गत श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े तथ्यों तथा फैलाई गई भ्रांतियों का उल्लेख किया गया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद्, शिव सेना तथा हिन्दू विवेक केन्द्र जैसे हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के विचार, कार्यों और उद्देश्यों की पूर्ण और प्रामाणिक जानकारी के लिए भी इस अंत:क्षेत्र की सहायता ली जा सकती है। 'अयोध्या डाट काम' के सम्बंधित संपर्कों (रिलेटिड लिंक) में 'भाजपा का अयोध्या पर श्वेत पत्र', 'अन्य समाचार पत्रों में अयोध्या सम्बंधी लेख', 'रामजन्मभूमि से सम्बंधित दस्तावेजी साक्ष्य' तथा 'बाबरी मस्जिद फोरम' सम्बंधी जानकारी दी गई है। यानी अयोध्या को नजदीक से जानने-समझने के लिए आप बस बटन दबाइए और अयोध्या के दर्शन कीजिए।

पांचजन्‍य से साभार

3 comments:

आशीष कुमार 'अंशु' said...

लेखों के अतिरिक्त इसमें प्रसिध्द पुस्तकों की समीक्षा तथा विवेचना दी गई है। इन पुस्तकों में 'बाबरनामा', 'अयोध्या एण्ड आफ्टर', 'रामायण', 'सीता शक्ति काव्य' आदि हैं।

IS NAI JAANAKARI KE LIY AABHAR.

Suresh Chandra Gupta said...

'हिंदुत्व' और 'हिंदुत्वनिष्ट' जैसे शब्दों का प्रयोग न ही किया जाय तो बेहतर है. इनके स्थान पर हिंदू धर्म ही कहना चाहिए. यह शब्द हिंदू शर्म को एक मानवीय विचारधारा बना देते हैं और दूसरे धर्मों के मानने वाले उस पर अपना डर और नकारात्मक प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर देते हैं. हिंदू धर्म समयातीत सिधान्तों पर आधारित है, किसी व्यक्ति विशेष द्वारा प्रारम्भ नहीं किया गया. मानव निमित धर्मों को मानने वाले हिंदू धर्म को समझ नहीं पाते और शरारती तत्वों को भ्रम फेलाने का मौका मिल जाता है.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...
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