Friday, December 28, 2007

देवभूमि हिमाचल में भी लहराया भगवा ध्वज


गुजरात में मोदी की रहनुमाई में विजय यात्रा पूरी करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आज देवभूमि माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश में भी भगवा परचम फहराया। राज्य में भाजपा ने कांग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए स्पष्ट बहुमत से सत्ता छीन ली। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की 68 विधानसभा सीटों में से 41 पर कब्जा किया जबकि कांग्रेस सिर्फ 23 सीटों तक सिमट कर रह गई। एक पर बसपा और तीन पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। चुनावों में उतरने से पूर्व ही प्रो. प्रेम कुमार धूमल को अपने मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर उतरी भाजपा नेताओं ने गुजरात विजय के बाद ही विश्वास व्यक्त करना शुरू कर दिया था कि हिमाचल प्रदेश में भी उसकी ही सरकार बनेगी। मतदान के बाद एक्जिट पोल में भी भगवा सरकार बनने का इशारा मिला था। कांग्रेस को जहां राज्य में सत्ता विरोधी प्रभाव से उबरना था वहीं भाजपा के पास बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, राज्य की खराब होती वित्तीय व्यवस्था और कुछ सेवाओं पर इस्तेमाल शुल्क लगाए जाने के मुद्दों की फसल थी। राज्य में पहली बार पूरे कार्यकाल तक सरकार चलाने में सफल रही कांग्रेस के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह रोहरू विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हो गए लेकिन उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य अपनी सीटें नहीं बचा सके। सरकार के खेवनहारों की पराजय के कारण कांग्रेस को पिछली विधानसभा के मुकाबले 20 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। राज्य में किसी एक पार्टी के दोबारा शासन में आने का चलन 1971 में राज्य की स्थापना के बाद से ही बहुत कम रहा है। कांग्रेस ने हालांकि सबसे ज्यादा समय तक शासन किया है लेकिन उसका लगातार सबसे लंबा शासन 1982 से 1990 तक रहा।

धूमल को शनिवार को भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में विधायक दल का नेता चुना जायेगा। गुजरात के बाद हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद अब भाजपा नेताओं का दावा है कि देश में अगली सरकार राजग की बनेगी और उनकी पार्टी आम चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी। भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने पार्टी की जीत पर नई दिल्ली में कहा कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में पार्टी की जीत लोकसभा चुनावों से पहले का ट्रेलर है और कांग्रेस एवं संप्रग शासन की उलटी गिनती शुरू हो गई है। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि हिमाचल और गुजरात में चुनावी जीत के बाद मैं महसूस करता हूं कि देश की जनता इस निष्कर्ष पर पहुंच गई है कि सिर्फ भाजपा ही अच्छा शासन दे सकती है। हमीरपुर जिले की बामसान सीट पर कांग्रेस के कर्नल बीसी लगवाल को 26 हजार से अधिक मतों से पराजित करने वाले धूमल ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार से मतभेदों का खंडन करते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने संबंधी फैसला आलाकमान ने कुमार की सहमति से लिया है।

भावी मुख्यमंत्री ने कहा हम साथ हैं, फैसला उनकी सहमति से लिया गया। उन्होंने कांग्रेस पर विशेष तौर पर विकास के मोर्चे सहित सभी क्षेत्रों में जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। मंत्रिमंडल में शामिल विद्या स्टोक्स सहित कई सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा। वन मंत्री रामलाल ठाकुर और उद्योग मंत्री कुलदीप कुमार को क्रमश: कोटकहलूर और गगरेत सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के हाथों पराजय का स्वाद चखना पड़ा। सोलन जिले की अरकी सीट से किस्मत आजमा रहे दस जनपथ के पूर्व रसोइए पदम राम के पुत्र प्रकाश चंद कराद को पराजय का सामना करना पड़ा। इस सीट पर भाजपा के गोविंद राम विजयी हुए। कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के तौर पर उतरे विधानसभा उपाध्यक्ष धरमपाल ठाकुर दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा को 2003 के चुनावों में सिर्फ 16 सीटों पर कामयाबी मिली थी जबकि कांग्रेस ने 43 सीटें जीती थीं।

उत्तर प्रदेश की सोशल इंजीनियरिंग को राज्य में आजमाने 67 सीटों पर उतरी बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विजय सिंह मनकोटिया सहित उसके 65 उम्मीदवारों को पराजय का सामना करना पड़ा। मनकोटिया कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे। पार्टी को एकमात्र सफलता मिली जब पार्टी उम्मीदवार संजय चौधरी कांगडा से विजय हासिल करने में सफल रहे। राज्य में कुल 336 उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा ने सभी 68 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि कांग्रेस ने 67 प्रत्याशी मैदान में खड़े किए थे। दलित वोट बैंक पर बसपा का एकाधिकार नहीं बनने देने के प्रयास में लगी केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा ने 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारे पर उसकी झोली खाली रही। उत्तार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सपा ने भी 12 उम्मीदवार खड़े किए थे जबकि शरद पवार की राकांपा ने चार प्रत्याशियों को टिकट दिया था। 58 निर्दलीय चुनाव मैदान में थे जिनमें से मात्र तीन को कामयाबी मिली। राज्य में दो चरणों में मतदान कराया गया था। पहले चरण में 14 नवंबर को लाहौल स्पीति, किन्नौर और भरमौर की आदिवासी सीटों के लिए मतदान हुआ था। 19 दिसंबर को दूसरे चरण में शेष 65 सीटों पर वोट डाले गए थे। मतगणना आज सुबह आठ बजे से शुरू हुई और तीन घंटे के भीतर ही परिणाम आने का सिलसिला शुरू हो गया। राज्य में पार्टी की जीत का संकेत मिलने के साथ ही भाजपा कार्यकर्ता जश्न में डूबने लगे और जैसे-जैसे पार्टी की सीटों की संख्या बढ़ने लगी वैसे-वैसे कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ता चला गया और नेताओं ने सरकार गठन के लिए पहल कर दी। स्रोत: प्रभासाक्षी ब्यूरो

यूपीए सरकार के पतन की शुरुआत: सुषमा स्वराज


भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि केन्द्र से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के पतन की शुरुआत हो चुकी है। वह हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस साल पहले उत्तराखण्ड और पंजाब और फिर गुजरात तथा अब हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत से साबित हो गया है कि संप्रग सरकार से निराश जनता भाजपा की ओर देख रही है।

उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य कर्नाटक विधानसभा चुनाव हैं तथा अगले वर्ष होने वाले सभी विधानसभा चुनावों के लिए भी पार्टी ने कमर कस ली है। स्वराज ने कहा कि वैसे तो लोकसभा चुनाव 2009 में होने हैं लेकिन यदि उससे पहले भी चुनाव हो जाते हैं तो पार्टी अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि इस सरकार से किसान, मजदूर, मध्यमवर्ग समेत हर वर्ग के लोग परेशान हैं और इस सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि यह कहना कि अगले वर्ष राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भाजपा हार जाएगी, गलत है क्योंकि यहां पर पार्टी चुनावी तैयारी शुरू कर चुकी है। स्वराज ने कहा कि अगले वर्ष होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव भी हम जीतेंगे और उसके बाद बड़ी दिल्ली यानि केन्द्र में भी भाजपा ही सरकार बनाएगी। स्रोत: प्रभासाक्षी ब्यूरो

कांग्रेस से लोगों का मोहभंग हो गया: राजनाथ सिंह


भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में पार्टी को मिली जीत से उत्साहित होकर कहा है कि अब लोगों का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए कहा कि हमें जीत का जश्न तो मनाना चाहिए लेकिन अति उत्साह में नहीं आकर अभी से लोकसभा चुनावों की तैयारी में जीजान से जुट जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार पैकेजों की घोषणा धार्मिक आधार पर करती है जिससे जनता में गलत संदेश जा रहा है और अब उसका इस सरकार से मोहभंग हो चुका है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि महंगाई, आतंकवाद और तुष्टिकरण की नीति के कारण जनता परेशान है जिससे वह भाजपा की ओर आशा भरी निगाह से देख रही है। स्रोत: प्रभासाक्षी ब्यूरो

हिमाचल प्रदेश में भी खिला कमल


गुजरात के बाद हिमाचल प्रदेश में भी बीजेपी का कमल खिल गया है। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के सभी 68 सीटों के रुझान या नतीजे मिल चुके हैं। बीजेपी 41 सीट जीती है। जबकि राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को 23 सीटों पर सफलता मिली है। 3 सीट निर्दलीयों की झोली में गई है और एक पर बीएसपी ने बाजी मारी है।
बीजेपी की ओर से पहले ही मुख्यमंत्री के उम्मीदवार घोषित किए जा चुके प्रेम कुमार धूमल बमसान से जीत गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि वह 30 दिसंबर को शपथ लेंगे। शनिवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक होगी जिसमें धूमल को औपचारिक रूप से विधायक दल का नेता चुना जाएगा। शिमला जिले के रोहरू विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के खुशीराम बलनाताह को हरा दिया है। बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल ने हमीरपुर जिले के बमसान विधानसभा क्षेत्र में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांगेस के बी.सी. लगवाल को हराया। इन चुनावों में बीजेपी ने सभी 68 सीटों पर अपने उम्मीदवार लड़ाए थे , जबकि कांग्रेस ने 67, एलजेपी ने 40 और समाजवादी पार्टी ने 12 उम्मीदवार खड़े किए थे। चुनावों में 58 निर्दलीयों ने भी भाग्य आजमाया है।

हिमाचल के नतीजे से भाजपा में उत्साह

नई दिल्ली। गुजरात के बाद हिमाचल प्रदेश में जीत से उत्साहित भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि जनता कांग्रेस से पूरी तरह से तंग आ चुकी है। वह भाजपा को ही विकल्प के तौर पर देखती है इसलिए कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस लें।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पहले गुजरात और अब हिमाचल प्रदेश में पार्टी को मिली जीत से स्पष्ट हो जाता है लोग भाजपा को आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। महंगाई, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण तथा सुरक्षा की लचरता के कारण लोगों का कांग्रेस से मोह भंग हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को विशेष पैकेज दिया जाता है तो वह धर्म के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक पिछड़ेपन और गरीबी के आधार पर दिया जाना चाहिए। राजनाथ ने हिमाचल की जीत पर भाजपा कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि अब सभी कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए जी जान से जुट जाना चाहिए।

उधर, भाजपा ने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पार्टी को मिली विजय तो अभी लोकसभा चुनावों में मिलने वाली उस सफलता का ट्रेलर भर है, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में केंद्र में भगवा दल की सरकार बनेगी।

भाजपा के पक्ष में रहे हिमाचल चुनावों के रुझानों से उत्साहित भाजपा संसदीय दल की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस और संप्रग की उलटी गिनती शुरू हो गई है। हिमाचल की चुनावी विजय तो लोकसभा चुनाव में मिलने वाली सफलता का ट्रेलर मात्र है। पार्टी के प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि भाजपा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में कें द्र में भाजपा की सरकार बनेगी।

पहाड़ पर लहराया केसरिया परचम

गुजरात के बाद हिमाचल में भी केसरिया परचम का लहराना केंद्र की यूपीए सरकार को सकते में लाने के लिए काफी है। हालांकि केंद्रीय राजनीति में हिमाचल की खास भूमिका नहीं रही फिर भी इस जीत का दूरगामी प्रभाव केंद्र की राजनीति पर पड़ने की पूरी संभावना है। हिमाचल विधानसभा चुनाव के परिणाम से जहां भाजपा का मनोबल बढ़ा है वहीं कांग्रेस उत्तर प्रदेश और गुजरात में खराब प्रदर्शन के बाद हिमाचल से भी अपना किला गंवाने के बाद हताश है। इससे पहले इस साल के शुरुआत में एक और पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की सत्ता भी भाजपा ने कांग्रेस से छीन ली थी।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर उमेश चौहान इस चुनाव परिणाम को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर मानते हुए कहते हैं कि यदि 1985 के बाद के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो हरेक पांच साल बाद यहां सत्ता बदलती रही है। कांग्रेस ने अपनी तरफ से विकास को मुद्दा बनाने की कोशिश की लेकिन उसे असफलता मिली। प्रो.चौहान ने कहा कि सत्तारूढ़ दल अक्सर विकास को मुद्दा बनाने की कोशिश करता है लेकिन इसमें अहम बात ये है जनता विकास को किस तरह से समझती है। विकास में बेजरोजगारी से लेकर तमाम तरह की चीजें शामिल होती हैं। हिमाचल प्रदेश में देखें तो साक्षरता में वृद्धि तो हुई है लेकिन बेरोजगारी बढ़ी है। हिमाचल में कुछ औद्योगिक इकाईयां भी आई हैं जिसका सीधा लाभ आमलोगों को नहीं हुआ। भष्ट्राचार पर लगाम नहीं लगाया जा सका जिसका नतीज कांग्रेस को भुगतना पड़ा।

लगातार हार की ठोकर ने कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर अपने गिरेबान में झांकने को मजबूर कर दिया है। सोनिया का करिश्माई नेतृत्व भी कामयाब नहीं हो पा रहा है। गुजरात की जीत पर जहां नरेंद्र मोदी के व्यक्त्तिव का जादू चला वहीं हिमाचल में भाजपा की जीत एंटी इनकैंबेंसी फैक्टर के कारण मानी जा रही है। हिमाचल में गुजरात की तरह मौत का सौदागर या सोहराबुद्दीन जैसे शब्दों के हथियार नहीं चले। यहां सत्ता के प्रति लोगों में आक्रोश था जिसे उन्होंने अपने मतों से जाहिर कर दिया। भाजपा भी शुरुआती असमंजस के बाद प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करके साहसी फैसला लिया, जो सही साबित हुआ। नीरज कुमार दैनिक भास्कर

हिमाचल में भाजपा को पूर्ण बहुमत


28 दिसम्‍बर 2007 एजेंसियां जोश18.काम शिमला।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 68 सीटों में से 41 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। राज्‍य में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। उसके खाते में 23 सीटें आई है। राज्‍य में बहुजन समाज पार्टी को एक सीट मिली है। जबकि अन्‍य को 3 सीटें मिली हैं।
भाजपा के प्रेम कुमार धूमल का मुख्‍यमंत्री बनना लगभग तय है। वे बमसन विधानसभा सीट से निर्वाचित घोषित किए गए। मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस उम्‍मीदवार वीरभद्र सिंह रोहडू विधानसभा सीट से चुनाव जीत गए हैं। राज्य के 65 विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में 19 दिसम्बर को तथा किन्नौन, लाहौल स्पीती और भरमौर जनजातीय क्षेत्रों में 14 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था।
भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में सभी 68 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में 67 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा।

अंतिम दलीय स्थिति भाजपा 41 कांग्रेस 23 बसपा 1 अन्‍य 3 कुल सीट 68

Wednesday, December 26, 2007

वामपंथियों का इतिहास


राष्ट्र के हर महत्वपूर्ण मोड़ पर वामपंथी मस्तिष्क की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय भावनाओं से अलग ही नहीं उसके एकदम विरूध्द रही है। गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन के विरूध्द वामपंथी अंग्रेजों के साथ खड़े थे। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को 'तोजो का कुत्ता' वामपंथियों ने कहा था। मुस्लिम लीग की देश विभाजन की मांग की वकालत वामपंथी कर रहे थे। आजादी के क्षणों में नेहरूजी को 'साम्राज्यवादियों' का दलाल वामपंथियों ने घोषित किया। भारत पर चीन के आक्रमण के समय वामपंथियों की भावना चीन के साथ थी। अंग्रेजों के समय से सत्ता में भागीदारी पाने के लिए वे राष्ट्र विरोधी मानसिकता का विषवमन सदैव से करते रहे। कम्युनिस्ट सदैव से अंतरराष्ट्रीयता का नारा लगाते रहे हैं। वामपंथियों ने गांधीजी को 'खलनायक' और जिन्ना को 'नायक' की उपाधि दे दी थी। खंडित भारत को स्वतंत्रता मिलते ही वामपंथियों ने हैदराबाद के निजाम के लिए लड़ रहे मुस्लिम रजाकारों की मदद से अपने लिए स्वतंत्र तेलंगाना राज्य बनाने की कोशिश की। वामपंथियों ने भारत की क्षेत्रीय, भाषाई विविधता को उभारने की एवं आपस में लड़ने की रणनीति बनाई। 24 मार्च, 1943 को भारत के अतिरिक्त गृह सचिव रिचर्ड टोटनहम ने टिप्पणी लिखी कि ''भारतीय कम्युनिस्टों का चरित्र ऐसा कि वे किसी का विरोध तो कर सकते हैं, किसी के सगे नहीं हो सकते, सिवाय अपने स्वार्थों के।'' भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले गांधी और उनकी कांग्रेस को ब्रिटिश दासता के विरूध्द भूमिगत आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन जैसे देशभक्तों पर वामपंथियों ने 'देशद्रोही' का ठप्पा लगाया।

Sunday, December 23, 2007

विचार और विकास के गठजोड़ से मिली गद्दी!


मुंबई. गुजरात की जनता के मतों से भारतीय राजनीति के चुनावी समाजशास्त्र में फिर एक योग घटित हुआ है। भाजपा ने एक बार फिर चुनाव पूर्व तमाम दावों और संभावनाओं को खारिज करते हुए गुजरात में स्पष्ट बहुमत हासिल कर ली है।

विचारधारा और विकास का गठजोड़ मोदी की इस जीत को विभिन्न नजरियों से देखा जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर राकेश सिन्हा का मानना है कि यह विचारधारा और विकास के गठजोड़ की जीत है। एकात्ममानववाद के प्रस्फुटिकरण के लिए इन दोनों का गठजोड़ होना आवश्यक है। नरेंद्र मोदी ने गुजरात में बगैर किसी अपराधबोध के विचारधारा और विकास के गठजोड़ के साथ कार्य किया जिसके फलस्वरूप उन्हें बड़ी सफलता मिली।

विकास के कामों में उनकी ईमानदारी ने एंटी इंक्म्बेंसी फैक्टर को रोके रखा। राकेश सिन्हा ने कहा कि गुजरात में सोनिया गांधी की व्यक्तिगत हार भी हुई क्योंकि प्रदेश स्तर पर मोदी का मुकाबला करने के लिए कोई कद्दावार नेता नहीं था, और चुनाव की कमान सोनिया गांधी ने संभाल रखी थी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बाद गुजरात चुनाव में राहुल गांधी की दूसरी हार है।

प्रोफेसर सिन्हा ने कहा कि गुजरात के चुनाव परिणाम से इस बात को बल मिलता है कि गुजरात की जनता ने हिंदुत्व के राजनीतिक स्वरूप को स्वीकार किया है। मोदी को मिले व्यापक जनसमर्थन का एक कारण उनके आतंकवाद विरोधी सख्त तेवर को मानते हुए प्रो. सिन्हा ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी स्वर को पहले से अधिक मुखर किया है। प्रो. सिन्हा का कहना है कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने तुष्ष्टिकरण पर आधारित कांग्रेस की पूर्व व्यवस्था को खत्म किया।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर विनोद प्रसाद सिंह का मानना है कि गुजरात में कांग्रेस ने भी वही कार्ड खेला जिसका मुकाबला कर पाने में मोदी माहिर रहे हैं। कांग्रेस को बुनियादी मुद्दों पर बात करनी चाहिए थी। इससे परिणाम बहुत हद तक बदल सकते थे। हालांकि प्रो. सिंह का मानना है कि मोदी ने गुजरात में विकास का काम किया है लेकिन वह अभी आम आदमी के पूरे हक में नहीं आ सका है।

इस परिणाम से भाजपा में नरेंद्र मोदी का कद काफी बढ़ गया है। मोदी ने यह जीत भाजपा के कद्दावर नेताओं के विरोध के बावजूद हासिल की है। जहां एक ओर भाजपा के असंतुष्ट नेता मोदी के राजनीतिक भविष्य को मटियामेट करने पर तुले थे वहीं मोदी ने इस चुनौती को भी सहजता से लिया और अपने स्टैंड पर कायम रहे। वे सभी मुद्दे जो मोदी के वोटों को काटने के लिए छेड़े गए थे, उसे भी मोदी ने अपने पक्ष में कर लिया। सोनिया गांधी द्वारा मौत का सौदागर कहने पर उन्होंने सोहराबुददीन सहारा लिया और जनसमर्थन को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहे। साभार- दैनिक भास्‍कर

27 दिसं को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे मोदी


अहमदाबाद (भाषा)। गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी की रणनीति के सहारे शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत के साथ लगातार चौथी बार सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। मोदी 27 दिसंबर को तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।


182 सदस्यीय विधानसभा के मात्र आठ नतीजे आने शेष हैं और अब तक मिले परिणामों के अनुसार भाजपा ने 111 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुत संभव है कि सदन में भाजपा दो तिहाई बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाए। पिछले विधानसभा चुनाव में 127 सीट हासिल करने वाली भाजपा की इस जीत को 57 वर्षीय मुख्यमंत्री के करिश्माई व्यक्तित्व पर जनता की मोहर के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नरेन्द्र मोदी की सरकार पर हमला बोलने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री से फोन पर बात की और उन्हें जीत की बधायी दी। नतीजों की पृष्ठभूमि में स्थिति का जायजा लेने के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड की आज शाम दिल्ली में बैठक हो रही है।


27 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे मोदी ने मणिनगर में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और केन्द्रीय मंत्री दिनशा पटेल को 87 हजार मतों से मात दी है। मोदी ने पार्टी के बागियों को भी करारा जवाब दिया और सौराष्ट्र क्षेत्र की 63 में से 45 सीटें भाजपा के खाते में गयीं। दंगों के सबसे अधिक चपेट में आने वाले मध्य गुजरात में भाजपा कुछ सीटों पर कांग्रेस के हाथों शिकस्त खा बैठी लेकिन बाकी जगहों पर उसका प्रदर्शन शानदार रहा। पार्टी ने उत्तर और दक्षिणी गुजरात में कांग्रेस को पछाड़ दिया। चुनाव हारने वाले कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में पूर्व उप मुख्यमंत्री नरहरि अमीन (मतार) तथा भाजपा के बागी बेछार बदानी प्रमुख रहे। बदानी ने लाठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। मोदी मंत्रिमंडल के चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों में अशोक भट्ट आनंदीबेन पटेल तथा रमनलाल वोरा प्रमुख रहे। राकांपा के प्रदेश प्रमुख जयंत पटेल बोस्की भी सारसा से चुनाव जीतने में सफल रहे। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की यह जीत एक निर्णायक मोड़ है और यह पार्टी की केन्द्र में वापसी का संकेत भी है।

गुजरात का जनादेश


गुजरात विधानसभा के लिए हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने साफ बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी को राज्य में 117 सीटें हासिल हुई हैं जो पिछली बार से 10 कम हैं। इसके बावजूद भाजपा ने गुजरात में धमाकेदार जीत दर्ज की है। हालांकि मतगणना से पहले हुए विभिन्न सर्वेक्षणों में पार्टी की जीत को तो तय माना जा रहा था लेकिन इतने बड़े अंतर से जीत होगी, यह किसी को नहीं लगा था। अलबत्ता, चुनाव नतीजों ने गुजरात में नरेंद्र मोदी की ताकत का अहसास करा दिया है।
गुजरात विधानसभा की 182 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इन सभी स्थानों के नतीजे आ गए हैं जिनमें से 117 भाजपा और 62 कांग्रेस के पक्ष में गए हैं। अन्य दलों और उम्मीदवारों को 3 स्थान मिले। प्रदेश विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 92 सीटों की जरूरत थी।मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिनगर से 87 हजार से भी अधिक मतों से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत स्थिति का अहसास करा दिया है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री दिन्शा पटेल को शिकस्त दी। मोदी के मंत्रिमंडलीय सहयोगी रमनलाल वोहर (समाज कल्याण), वजुभाई वाला (वित्ता) तथा आनंदीबेन पटेल (शिक्षा) चुनाव जीत गए हैं। मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव जीता है। स्रोत: प्रभासाक्षी ब्यूरो

गुजरात में लहराया केसरिया -दैनिक जागरण


अहमदाबाद। गुजरात में आजादी के बाद से लड़ी गई सत्ता की अब तक की सबसे तीखी लड़ाई में अंतत: मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जनता ने विजयश्री का वरण करा दिया। जनता की जय जय के साथ ही कांग्रेस को भी हारकर उनकी जयजय करनी पड़ी।

हालांकि भाजपा को सीटों का घाटा उठाना पड़ा लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 92 के मुकाबले सीटों पर कब्जा कर लगातार तीसरी बार वह सरकार बनायेगी। विधानसभा की कुल 182 सीटों में से अब तक 106 सीटों पर कब्जा कर भाजपा ने भगवा गढ़ फतह करने के कांग्रेस के मंसूबों को धूल धूसरित कर दिया। संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में मोदी को चुनौती दे रही पार्टी को मुकाबला नजदीकी होने की उम्मीद थी और हर दौर के मतदान के बाद एक्जिट पोल के नतीजों से उसकी आशा बढ़ रही थी लेकिन अब तक उसे केवल 55 सीटें ही मिली हैं। अन्य मात्र 4 सीट जीतने में सफल रहे है।

वर्ष 2002 में गोधरा दंगों के बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 127 तथा कांग्रेस ने 51 सीटें जीती थीं और इस बार भले ही कांग्रेस की सीटों में कुछ इजाफा हो रहा हो लेकिन दोनों दलों में जीत का अंतर काफी रहेगा।

गुजरात में मुख्यमंत्री पद की हैट्रिक के संकेत मिलने के साथ ही मोदी ने अपने अंदाज में प्रसन्नता जताते हुए कहा कि वह सीएम हैं और सीएम रहेंगे।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गुजरात में जबर्दस्त कामयाबी के बाद इन सुझावों को खारिज कर दिया कि मोदी को केंद्रीय राजनीति में लाया जाएगा और साफ तौर पर कहा कि लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने रहेंगे।

मोदी तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ 27 दिसंबर को लेंगे। मणिनगर से 87 हजार से भी अधिक मतों से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत स्थिति का अहसास करा दिया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ढींढसा पटेल को शिकस्त दी है।

शुरूआती रुझानों के बीच ही नरेंद्र मोदी ने एसएमएस संदेश में कहा कि वह सीएम हैं और सीएम रहेंगे। उन्होंने सीएम का मतलब स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ कामन मैन है।

मोदी के मंत्रिमंडलीय सहयोगी रमनलाल वोहरा वजुभाई वाला (वित्त) तथा आनंदीबेन पटेल (शिक्षा) चुनाव जीत गए हैं।

दिल्ली से मिली खबरों के अनुसार भाजपा मुख्यालय में जहां जश्न का माहौल है वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने घुटने टेकते हुए न केवल अपनी हार स्वीकार कर ली बल्कि मोदी को बधाई दी है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने चुनाव परिणामों को पार्टी की विचारधारा की जीत और मोदी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया वहीं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि गुजरात चुनावों का राष्ट्रीय राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुट जाने का भी आह्वान किया।

कांग्रेस ने गुजरात में अपनी पराजय पूरे नतीजे आने से पहले ही स्वीकार कर ली और उसके प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि नरेंद्र मोदी की महान विजय है यह उल्लेखनीय जीत है। उनकी जीत पर मुझे कोई ईर्ष्‍या नहीं है।

मोदी का करिश्‍माई सफर


23 दिसम्‍बर 2007 सीएनएन-आईबीएन नई दिल्‍ली।
उत्‍तरी गुजरात के वड़नगर में 17 सितम्‍बर 1950 को जन्‍में नरेन्‍द्र मोदी का राजनीतिक सफर राष्‍ट्रीय स्‍वंय सेवक संघ के प्रचारक के रूप में शुरू हुआ। उन्‍हें वर्ष 1972 में प्रचारक के रूप में हिमाचल प्रदेश के कागड़ा भेजा गया। उनके संगठन कौशल को देखते हुए वर्ष 1984 में उन्‍हें भाजपा में प्रवेश मिला। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी के ‘प्रिय’ मोदी ने उनकी सोमनाथ यात्रा में जमकर हिस्‍सेदारी ली। वर्ष 1992 में उन्‍हें पार्टी का महासचिव बनाकर गुजरात का प्रभार सौंपा गया।

वर्ष1995 में उन्‍होंने गुजरात में विधानसभा चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाया गया। इस चुनाव में राज्‍य में भा