हितचिन्‍तक- लोकतंत्र एवं राष्‍ट्रवाद की रक्षा में। आपका हार्दिक अभिनन्‍दन है। राष्ट्रभक्ति का ज्वार न रुकता - आए जिस-जिस में हिम्मत हो

Saturday 23 August 2008

श्री‍अमरनाथ श्राईन बोर्ड की स्थापना, भूमिका और कार्य

1996 में विहिप के आह्वान पर पूरे देश से लगभग 50,000 यात्री अमरनाथ यात्रा के लिए आए। यात्रा में अनेक अड़चनें थीं। जिनमें से मुख्य यह थी कि पंजीकरण अपने राज्य की राजधानी में ही करवाना होगा। जम्मू में पंजीकरण की कोई व्यवस्था नहीं थी। यहां पर आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी। 1996 में ही एक भयंकर बर्फानी तूफान अमरनाथ यात्रा के रास्तों पर आया। इस तूफान की लपेट में आकर तीन सौ से ज्यादा श्रध्दालु मारे गये। यात्रियों के मरने का मुख्य कारण तो प्राकृतिक आपदा ही थी। परन्तु इस तूफान ने राज्य सरकार के द्वारा किये गये लचर प्रबंधों की पोल भी खोल दी। यात्रा भवनों, विश्राम स्थलों इत्यादि स्थानों पर खाने पीने और ठहरने की सब व्यवस्थाएं चरमरा गई। देश भर में विश्‍व हिन्दू परिषद समेत कईं हिन्दू संगठनों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये सरकार से पूरी जांच पड़ताल करके किसी कमेटी के गठन की मांग की। परिणामस्वरूप सरकार हरकत में आई और नीतिश सेन कमेटी का गठन हुआ।

इस कमेटी ने निम्नलिखित सुझाव दिये-
(1) यात्रा मार्ग को चौडा किया जाये।

(2) यात्रा की समयावधि बढ़ाई जाये,

(3) प्रतिदिन यात्रियों की निर्धारित संख्या निश्चित की जाये,

(4) यात्रा मार्ग में अस्थाई आवास बनाये जायें। विश्‍व हिन्दू परिषद ने नीतिश सेन कमेटी के सुझावों का अध्ययन किया। कमेटी के सभी सुझावों के साथ-साथ यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए माता वैष्‍णो श्राईन बोर्ड की तरह ही एक बोर्ड बनाने का सुझाव दिया।

सरकार ने इस सुझाव को मानते हुये वर्ष 2000 में विधानसभा में बनाये गये एक विशेष एक्ट के द्वारा श्रीअमरनाथ श्राईन बोर्ड का गठन किया। इस एक्ट के अनुसार प्रदेश के महामहिम राज्यपाल अमरनाथ श्राईन बोर्ड के अध्‍यक्ष होंगे। अगर राज्यपाल हिन्दू नहीं है तो उनकी जगह राज्य के किसी प्रसिध्द धार्मिक हिन्दू व्यक्ति को अध्‍यक्ष के नाते नियुक्त किया जायेगा। दो सामाजिक महिलाओं सहित प्रदेश के दस हिन्दू श्राईन बोर्ड के सदस्य होंगे। यात्रा की व्यवस्था व पूजा अर्चना करने का अधिकार इस तरह श्राईन बोर्ड को मिल गया। तब से श्राईन बोर्ड अपने इस कार्य को बेहतर ढंग से निपटाता चला आ रहा था।

श्राईन बोर्ड ने पिछले आठ वर्षों में यात्रियों की सुविधाओं के लिए अनेक कार्य किये। यथा:

(1) यात्रियों का पंजीकरण पूरे भारत में जम्मू-कश्‍मीर बैंक की शाखाओं में शुरू हो गया।
(2) जम्मू में भी तत्काल पंजीकरण की व्यवस्था की गई।

(3।) यात्रा का आधार शिविर परेड ग्राउंड जैसे छोटे और असुरक्षित मैदान से हटाकर एम।ए। स्टेडियम के खुले एवं सुरक्षित मैदान में कर दिया गया। इसी प्रकार की व्यवस्था जम्मू के भगवती नगर में भी सब सुविधाओं के साथ की गई।

(4) वर्ष 2005 में यात्रा की अवधि एक महीने से बढ़ाकर दो महीने कर दी गई।

(5) सार्वजनिक लंगरों के लिए अनुमति दी गई और इनके प्रबंधकों को पूरी सुविधाएं दी गई।

(6) यात्रा मार्ग पर दी गईं सभी आधुनिक सुविधाओं को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की व्यवस्था की गई।

( 7) बालटाल से पवित्र गुफा तक हवाई मार्ग का प्रबंध भी किया गया। श्री अमरनाथ श्राईन बोर्ड के द्वारा सम्पन्न कुशल प्रबंधान से वर्ष 1999 में यात्रा की संख्या 11 हजार से बढ़कर वर्ष 2007 में 8 लाख तक पहुंच गई।

भूमि आवंटन आदेश जारी 26-5-2008
विषय : वन विभाग की 39।88 हैक्टेयर भूमि जो श्री अमरनाथ श्राईन बोर्ड को बालटाल और दोमेल में ढांचा खड़ा करने के लिए ''सिंध वन विभाग'' में दी गई है।

उल्लेख :- मंत्रि‍मंडल के निर्णय क्रमांक 94 दिनांक 20-5-2008 राज्य आदेश नं। 184 एफ।एस।टी। ऑफ 2008 दिनांक 26-5-2008, 39.88 हैक्टेयर वन भूमि जो कि कम्पार्टमैण्ट नं. 638 सिंध ब्लाक और कालान रेंज सिंध में पड़ती है का आवंटन किया गया। यह भूमि बालटाल और दोमेल में बने-बनाए ढांचे खड़े करने के लिए श्राईन बोर्ड को दी गई ताकि इसका उपयोग यात्रियों के अस्थायी निवास के लिए हो सके।

निम्नलिखित शर्तों पर यह भूमि आवंटन की गई-
1. इस भूमि के ऊपर मालिकाना अधिकार नहीं बदलेगा।
2. आवंटित वन भूमि का उपयोग केवल उसी मकसद के लिए किया जाएगा जिसके लिए आवंटित है। वन विभाग की आज्ञा के बिना यह भूमि किसी दूसरी संस्था को नहीं दी जा सकती।
3. यह वन भूमि किसी के पास न तो गिरवी और न ही पट्टे पर दी जाएगी।
4. उपयोग में लाने वाली संस्था 2,31,30,400.00 रूपये जैसा कि संबंधित डी.एफ.ओ. ने इसकी कीमत सुप्रीम कोर्ट के 30-10-2002 के आदेश के अनुसार लगाई है, अदा करेगी। ( 1 A No. 566 writ petition civil No. 2002, 1995 T.S.R. गोडे वर्मन शुरूमलपाद बनाम भारत संघ)
5. उपयोग में लाने वाली संस्था 19 लाख 94 हजार रूपये 39.88 हैक्टेयर भूमि के मुआवजे के तौर पर अदा करे।
6. उपयोग में लेने वाली संस्था ऐसे कदम उठाएगी वैज्ञानिक माध्यमों से जिससे साथ बहने वाले सिंध नाले का जल प्रदूषित नहीं होगा।
7. किसी प्रकार का नुकसान जो वन भूमि को उपयोग करने वाली संस्था, कर्मचारी, ठेकेदार या मजदूरों के द्वारा होगा उसका 10 गुणा संस्था से वसूला जायेगा।
8. जब इस वन भूमि का उपयोग करने वाली संस्था को इसकी आवश्‍यकता नहीं रहेगी तो यह भूमि स्वत: ही वन विभाग की हो जाएगी बिना किसी मुआवजे के।
9. उपयोग करने वाली संस्था इसके दोनों किनारों पर Retaining Forest Wall का निर्माण करेगी और ऐसे दूसरे साधन अपनाएगी जिससे इस धरती में भूमि कटाव न हो।
उपयोग करने वाली संस्था Director soil conservation जम्मू से तकनीकी सलाह लेगी।
10. उपयोग करने वाली संस्था इस विषय के संबंधित विभागों से कानूनी इजाजत लेगी।
11. उपयोग करने वाली संस्था यह लिखकर देगी कि अगर जमीन के दाम बढ़ेंगे तो वह अतिरिक्त राशि वन विभाग को देगी।
12. सभी देनदारी जिसमें संस्था ने वन विभाग को करनी है संबंधित विभागों को नहीं कर देती है जिनमें वृक्ष कटने का हर्जाना, एन.पी.वी, जमीन का हर्जाना, मुख्य लेखाधिकारी के पास जमा न कराएं तब तक भूमि पर उपरोक्त संस्था का कब्जा नहीं होगा। इस बात का भी आष्वस्त करना होगा कि और किसी भी तरह का बकाया इस संस्था को भरना होगा।
13. संस्था को राज्य पर्यावरण बोर्ड के नियमों के अनुसार वह सब संभव सुरक्षात्मक कदम उठाने होंगे और उसके बाद ही संस्था को पूर्व निर्मित ढांचे यात्रियों के उपयोग के लिए खड़े करने होंगे।
12-7-2007 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 39वीं बैठक के अंदर सलाहकार समिति ने इस प्रस्ताव को पारित किया है।

जम्मू-कश्‍मीर सरकार के आदेशनुसार
प्रधान सचिव, वन विभाग
नोट : श्रीअमरनाथ श्राईन बोर्ड ने उपरोक्त सभी शर्तें स्वीकार कर ली थीं।
भूमि आबंटन आदेश निरस्त 1-7-2008
सरकारी आदेश क्रमांक -184, एफ.एस.टी. ऑफ 2008 तिथि 26-05-2008 जिसके अनुसार 39.88 हैक्टेयर भूमि जो कि श्रीअमरनाथ श्राईन बोर्ड को बालटाल और दोमेल में आवंटित की गई थी, को रद्द किया गया। जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार के आदेश से।
कमीशनर सैक्रेटरी
राज्य वन विभाग, भूमि आबंटन का आदेश

No comments: