हितचिन्‍तक- लोकतंत्र एवं राष्‍ट्रवाद की रक्षा में। आपका हार्दिक अभिनन्‍दन है। राष्ट्रभक्ति का ज्वार न रुकता - आए जिस-जिस में हिम्मत हो

Wednesday 12 November 2008

मानव खाल में कम्युनिस्ट दरिन्दों को मानवीय उम्रकैद नहीं, दरिन्दाई फाँसी चाहिए


सिंगूर में माकपा के कद्दावर नेता सुहरिद दत्ता और उनके समर्थक देबु मलिक को भूमि अधिग्रहण विरोधी कार्यकर्ता तापसी मलिक की वर्ष 2006 में हुई हत्या के मामले में एक स्थानीय अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई।

यह सिंगुर गांव की तापसी मलिक है. इसने अपनी ज़मीन टाटा को देने से मना कर दिया. इस युवती के साथ एक रात इसकी ज़मीन पर ही सीपीएम के लोगों ने बलात्कार किया और ज़िंदा जला दिया.

माकपा काडर के द्वारा आग में जलाये गये बच्चे

2 comments:

Suresh Chandra Gupta said...

आप सही कह रहे हैं, इन नर-पिशाचों को फांसी होनी चाहिए. अदालत ने उन्हें उम्र कैद दे कर तापसी और उस के परिवार वालों पर अन्याय किया है.

Ghost Buster said...

यही सच्चा चेहरा है घिनौने कम्युनिस्टों का. फांसी भी कम होती.