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Thursday 18 October 2007

श्री नरेन्‍द्र मोदी- विजयी विश्वास

लेखक- किशोर मकवाणा


विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही गुजरात के दो प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा एवं कांग्रेस में हलचल बढ़ गई है। किन्तु यहां चुनाव युध्द एकतरफा ज्यादा लग रहा है। एक ओर भाजपा में जहां गुजरात के विकास पुरुष एवं प्रामाणिकता की कसौटी पर खरे मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं, तो दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस में श्री मोदी की टक्कर का कोई नेता नहीं है। चर्चा है कि कांग्रेस के चुनाव प्रचार का पूरा दारोमदार कांग्रेस के नवनियुक्त महासचिव राहुल गांधी के कंधों पर होगा। पर राहुल गांधी कितने वोट खींच सकते हैं, इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश में मिल चुका है। सुबह से शाम तक धूल भरी सड़कों पर घूमने के बाद भी राहुल प्रदेश कांग्रेस में जान नहीं ला सके। उल्टे वहां कांग्रेस की सीटें कम हो गईं। इसलिए गुजरात में वे कांग्रेस को लाभ पहुंचा पाएंगे, इसमें सन्देह है।

आज गुजरात में मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता चरम पर है। जनता स्वयं कह रही है कि श्री मोदी ने पांच वर्ष में जितने काम किए हैं, उतने तो विगत 50 वर्ष में भी नहीं हुए थे। इस बात को विरोधी भी स्वीकार कर रहे हैं। गुजरात के वरिष्ठ लेखक एवं चिन्तक श्री गुणवंत शाह, जो भाजपा के आलोचक रहे हैं, कहते हैं, 'गुजरात भाग्यशाली है कि उसे एक ऐसा युवा नेता मिला है, जिसने सिर्फ 5 साल में 50 वर्ष के बराबर काम कर दिखाए हैं।' प्रसिध्द पत्रकार श्री भगवती कुमार शर्मा ने कहा, 'श्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिभा प्रामाणिक नेता की है। उन्होंने बहुत कार्य किया है। उनके स्तर का आज कोई भी नेता नहीं हैं।' वडोदरा के एम.एस. विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर प्रियवदन पटेल ने एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था के लिए गुजरात चुनाव के संदर्भ में एक सर्वेक्षण किया है, जिसका निष्कर्ष है कि आज भी राज्य के पटेल मतदाता भाजपा के साथ मजबूती से जुड़े हैं। राज्य की 66 प्रतिशत जनता नरेन्द्र मोदी के कार्यों से खुश है।

श्री मोदी की ईमानदारी के संदर्भ में विरोधी भी कहते हैं कि उन पर उंगली नहीं उठाई जा सकती। अगर वे पुन: मुख्यमंत्री बनते हैं तो गुजरात विश्वभर में एक प्रतिस्पर्धी के रूप में उभरेगा। श्री नरेन्द्र मोदी की यह छवि सिर्फ कागज पर ही नहीं, धरातल पर भी दिखती है। लोग उनके कार्यों से उनके प्रशंसक बने हैं। भ्रष्टाचारियों से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। यहां तक कि भ्रष्टाचार में डूबे अपनी पार्टी के लोगों को भी उन्होंने जेल में डलवाया। श्री मोदी 18-18 घंटे स्वयं काम करते हैं और सरकारी तंत्र को भी चुस्त-दुरुस्त रखते हैं। अपनी मेहनत एवं सूझबूझ से उन्होंने गुजरात को देश का अग्रणी राज्य बनाया है। रिजर्व बैंक की रपट के अनुसार हाल के वर्षों में गुजरात में सबसे अधिक पूंजीनिवेश हुआ है। राजीव गांधी फाउण्डेशन (जिसकी रपट पर कांग्रेस में खूब खलबली मची थी) ने भी गुजरात को औद्योगिक दृष्टि से सबसे अधिक अनुकूल राज्य कहा है। विश्वविख्यात उद्योगपति रतन टाटा ने तो यहां तक कहा है कि जो गुजरात में पूंजीनिवेश नहीं करता है, वह नासमझ है। केवल औद्योगिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी स्थिति बदली है। कृषि उत्पादन 9000 करोड़ रु. से बढ़कर 34,000 करोड़ रु. तक पहुंच गया है। दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े शहरों में भी बिजली की किल्लत है, किन्तु गुजरात देश का ऐसा पहला राज्य है जहां गांवों में भी 24 घंटे बिजली रहती है। 'ज्योति ग्राम योजना' के माध्यम से गांव-गांव में बिजली पहुंची है। आपराधिक घटनाओं में 26 प्रतिशत की कमी आई है।

श्री मोदी ने मछुआरों के लिए 11 हजार करोड़ रु. एवं वनवासियों के लिए 15 हजार करोड़ रु. की दो योजनाएं शुरू कीं, जिनसे इन वर्गों में खुशहाली आई है। उन्होंने सरकारी योजनाओं को क्रियान्वित कराने में जनता की सहभागिता को प्राथमिकता दी है।

कुछ विश्लेषक कहते हैं कि श्री मोदी को भाजपा के ही असंतुष्ट हानि पहुंचा सकते हैं, किन्तु इस तर्क में दम नहीं है। वास्तविकता तो यह है कि इन असन्तुष्टों का अस्तित्व भाजपा के बिना कुछ भी नहीं है। कांग्रेस ने श्री नरेन्द्र मोदी के विरुध्द अनेक मनगढ़ंत आरोप लगाए, किन्तु वे सभी बेअसर हुए। चुनाव में विकास के साथ-साथ रामसेतु का मुद्दा भी उठने वाला है। चुनावी पंडित कह रहे हैं कि यह शायद गुजरात का पहला ऐसा चुनाव है जिसमें जनता पूरी तरह भाजपा के साथ है। इस बार भाजपा यदि 150 सीटों का आंकड़ा पार कर ले तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

1 comment:

Shrish said...

नरेन्द्र मोदी की सूझ-बूझ का तो लोहा मानना ही होगा जिसने गुजरात को देश का समृद्धतम राज्य बना दिया है।

बाकी उनके बारे में मैं कुछ कह नहीं सकता क्योंकि मैं गुजरात से नहीं हूँ।