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Wednesday 25 February 2009

यूपीए की असफलताएं (भाग-9) / अल्‍पसंख्‍यक तुष्टिकरण

सच्चर समिति : मजहबी आरक्षण की वकालत
केन्द्र सरकार ने मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जानकारी के लिए जस्टिस राजेन्द्र सच्चर के नेतृत्व में समिति का गठन किया। राजेन्द्र सच्चर समिति की सिफारिशें 'मजहबी आधार पर आरक्षण' प्रदान करने वाली है जिन्हें देखकर 1906 में मुस्लिम लीग की याद आ जाती है, जिसके कारण देश का विभाजन हुआ। सच्चर समिति की रिपोर्ट विभाजनकारी है और पूरी तरह से पूर्वाग्रहों से भरी पड़ी है। यह विकृत दृष्टिकोण को प्रकट करती है। समिति की सारी कवायद केवल यह साबित करने की रही कि मुस्लिम समाज हर क्षेत्र में बहुत पिछड़ा है। यदि मुस्लिम समुदाय की आज आजादी के 59 वर्ष बाद ये स्थिति है तो इसके लिए क्या वे ही लोग जिम्मेदार नहीं है जिन्होंने इन 59 में से 54 वर्षों तक देश में शासन किया।

मदानी की रिहाई- क्या ये सचमुच सेक्युलर है?
कांग्रेस, यूपीए के सहयोगी दल और वामपंथी पार्टियां अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के मामले में एक दूसरे से होड़ लगाने में जुटी हैं। यह बात फिर केरल की कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार और वामपंथियों वाले गठबंधन से सिद्ध हो जाती हैं। केरल में कांग्रेसनीत यूडीएफ ने 16 मार्च 2006 को विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें खौफनाक आतंकवादी अब्दुल नासर मदानी की रिहाई का प्रस्ताव किया गया है जबकि उस पर बम विस्फोट अभियुक्तों को शरण देने के गम्भीर आरोप रहे हैं।

आपको याद होगा कि फरवरी 1998 में एक चुनाव रैली में कोयम्बटूर में ओमा बाबू उर्फ मजीद तथा अन्य अभियुक्तों ने बम विस्फोट किए थे, जिसमें 59 लोगों की मृत्यु हो गई थी और 200 निर्दोष लोग विकलांग हो गए थे। ऐसे लोगों को पनाह देने वाले मदानी थे। इसके अलावा भी उनका सम्पर्क पाकिस्तान के आईएसआई एजेण्टों से था जो अल उम्मा कार्यकर्ता को प्रशिक्षण देते थे। किन्तु विधानसभा चुनावों को नजर में रखते हुए सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी और विपक्षी वामपंथियों ने मुस्लिम मतदाताओं की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए एक दूसरे से होड़ लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया। आतंकवाद से लड़ने वाले इन यूपीए और वामपंथियों के सेकुलरिज्म की ईमानदारी के क्या कहने? क्या इसे ही सेक्युलरिज्म कहा जाता है?

मजहब आधारित आरक्षण
केवल वोट बैंक राजनीति के कारण आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय हितों की उपेक्षा करते हुए मजहब के आधार पर केवल मुस्लिमों के लिए सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत सीटों का आरक्षण कर दिया। भाजपा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। उच्च न्यायालय ने मजहब आधारित आरक्षण को 'असंवैधानिक' करार दे दिया, फिर भी कांग्रेस संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ उपाए ढूंढने में लगी हुई है। कांग्रेस फिर अपनी युगों पुरानी अल्पसंख्यक वोट बैंक राजनीति पर लौट आई है। बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक विभाजन करके सरकार सामाजिक कट्टरवाद को जन्म दे रही है।

तमिलनाडु सरकार द्वारा मुस्लिमों और ईसाइयों को आरक्षण
तमिलनाडु सरकार ने शिक्षा संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में मुस्लिम और ईसाई समुदाय को आरक्षण देने की घोषणा की, जो समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश है। यह कार्य न केवल गैरसंवैधानिक है, बल्कि धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ भी है। संविधान सभा में बहस के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि धार्मिक आधार पर कोई आरक्षण नहीं दिया जाएगा। दुर्भाग्य की बात है कि यह सब कुछ वोट बैंक को ध्‍यान में रखकर किया जा रहा है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। सच तो यह है कि धार्मिक आधार पर आरक्षण धर्मान्तरण को बढ़ावा देता है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में साम्प्रदायिक आरक्षण
सेक्युलेरिज्म की आड़ में यूपीए के मानव संसाधन विकास मंत्री श्री अर्जुन सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में 50 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय न मानते हुए इसे असंवैधानिक करार दे दिया। फिर भी, सरकार उच्चतम न्यायालय पहुंच गई है। हालांकि यह मामला न्यायाधीन है, फिर भी श्री अर्जुन सिंह ने कहना जारी रखा है कि वह न्यायालय के आदेश के बाद भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने के लिए कृतबद्ध हैं।

कांग्रेस का 'तथाकथित सेक्युलर' चेहरा
हम यहां दो उदाहरण दे रहे हैं जिनमें कांग्रेस का वह सेक्युलर चेहरा सामने आ जाता है, जिसे कांग्रेस ने भारत को जाति और धर्म के आधार पर बांटा:
1. अक्तूबर 2005 में बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस ने धर्म और जाति के आधार पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की। यह सूची इण्डियन एक्सप्रेस सहित सभी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। इस पर कांग्रेस की प्रवक्ता श्रीमती अम्बिका सोनी के हस्ताक्षर थे।
2. यूपीए द्वारा गठित जस्टिस राजेन्द्र सच्चर समिति ने हमारी हथियारबंद सेना से रक्षा सेवाओं में सभी मुस्लिमों की संख्या व सूची देने के लिए कहा।

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