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Monday, 3 September, 2007

नरेन्द्र मोदी: अब तक के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री

भगवान श्रीराम ने जिस शासन-व्यवस्था को प्रजा के समक्ष रखा था, उसे बाद में लोगों ने आदर्श मानते हुए कहा कि अच्छे शासन का तात्पर्य यानी राम राज का आना है। मौजूदा समय में आदर्श शासन के लिए अंग्रेजी शब्दावली का उपयोग किया जाने लगा है, जो कि अब मॉडल राज्य के रूप में जनमानस के बीच जाना-पहचाना जा सकता है। मॉडल राज्य की खासियत यह है कि यह राम राज्य की तरह कथित सेक्युलरवादियों को सांप्रदायिक भी नहीं लगता। लेकिन आज भी देश के अंदर मॉडल राज्य या राम राज्य की परिकल्पना की सही तस्वीर सामने नहीं दिखाई देती।

मॉडल राज्य यानी किस प्रकार की शासन व्यवस्था? अमूमन नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित सरकार और यदि राज्य में शांति व्यवस्था कायम हो तो इसे मॉडल स्टेट माना जा सकता है। इससे आगे की सोच अभी हमारे समाज में दिखाई नहीं देती। पिछले कई वर्षों से गुजरात देश की राजनीति का केंद्र बना रहा है। इसकी वजह यह नहीं है कि वह बार-बार आतंकियों के निशाने पर रहा है, बल्कि यहां विकास के नये-नये प्रयोग से देश अवगत हो रहा है। विकास का यह फार्मूला गढनेवाले मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले पांच साल में जिस तरह से काम किया उससे उनके विरोधियों की बोलती तो बंद हो ही गयी, राज्य विकास के क्षेत्र में हिरण की तरह कुलांचे भरने लगा। बुनियादी सुविधाओं को कौन कहे खास मानी जानेवाली सुविधांए भी जब गांव-गांव पहुंचने लगी तो स्वाभाविक तौर पर राज्य की जनता ही नहीं देश और विश्व स्तर पर चर्चा शुरू हो गयी। योजनाओं को क्रियान्वयन करने वाले तंत्र में जान फूंक कर उन्होंने जिस इच्छाशक्ति का परिचय दिया उसी का परिणााम है कि चार-पांच दशक से झूल रहा नर्मदा डैम प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में आ पहुंचा। यानी जिस काम के लिए जितना समय आबंटित है, उतने समय में काम आज की नौकरशाही से काम करवा लेना अदम्य इच्छाशक्ति का ही कमाल कहा जा सकता है। नरेन्द्र मोदी ने यही काम गुजरात में कर दिखाया। यानी समय पर काम पूरा करवा कर प्रोजेक्ट कॉस्ट को बढने नहीं दिया। इससे राज्य की जनता का करोडों-अरबों रुपया ठेकेदारों, अधिकारियों और बिचौलियों के त्रिजोड के बीच जाने से बच गया।

दूसरा महत्वपूर्ण काम उन्होंने लोक भागीदारी का राज्य में सफल प्रयोग किया। यानी योजनाओं में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो, ऐसा प्रबंध उन्होंने किया। नर्मदा सब कैनाल से किस खेत में कितना पानी जायेगा? यह कौन तय करेगा? आमतौर पर गांव के पटवारी या तालुका स्तर के कर्मचारी के जिम्मे यह काम सौंप कर सरकारे निश्ंचित हो जाती हैं। लेकिन गुजरात में इस परंपरा को तोडते हुए मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसान समूहों की रचना कर उन्हें ही यह अधिकार सौंप दिया कि वे तय करे कि किस खेत में कितना पानी जाना चाहिए। इससे गांवों में झगडा-झंझट भी कम हो गया।

सांध्य-अदालतों की जरिये मामलों को फटाफट निबटाने का भी उन्होंने राज्य में सफल प्रयोग कराया। इसके अलावा उन्होंने जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया वह नारी शक्ति को जगाने का। गांधीनगर के दहेगाम में जब वे 19 जनवरी को महिला सम्मेलन संबोधित कर रहे थे, उसी समय उनकी इच्छाशक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे पूरे राज्य में महिला जागरण का अलख जगायेंगे और ऐसा ही हुआ। तीन-चार महीने के ताबडतोड महिला सम्मेलनों के जरिये उन्होंने तकरीबन 12 से 15 लाख महिलाओं को इकट्ठा कर उनके अधिकारों और सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं के संबंध में जानकारी दी। इन्हीं सभाओं के बाद जब महिलाओं से लोग यह पूछते कि इस तरह के महिला सम्मेलनों का आखिर हासिल क्या है? तो जवाब मिलता की इस तरह के महिला सम्मेलन तो हरेक तालुका में हर मास में एक बार होने चाहिए, जिससे कि उनके परिवार से लेकर समाज का कोई तबका उनके अधिकारों पर कुंडली न मारकर बैठ जाये।

बहरहाल गुजरात ने बेहतर शासन का जो नमूना देश के सामने रखा है, इसी का परिणाम है कि बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब आदि राज्यों के मंत्रिमंडल सदस्यों का दल जब-तब यहां आकर यहां की विकास योजनाओं को मॉडल के रूप में अध्ययन करता है और अपने राज्य के लिए प्रयोग करने पर विवश होता हैं। इसी क्रम में जब बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी गुजरात आये तो उन्होंने यहां की चार योजनाओं की तल्लीलनता के साथ अध्ययन किया। इसमें चिरंजीवी योजना, कन्या केळवनी योजना, ज्योतिग्राम योजना और ई-गवर्नेंस शामिल थे। बाद में उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में साफ तौर पर कहा कि वे बिहार के संदर्भ में भी इन योजनाओं के अमलीजामा पहनाने की नरेन्द्र मोदी सरकार की तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कर्मचारियों की निपुणता बढानेवाली कर्मयोगी शिविरों की भी भूरी-भूरी प्रशंसा की। गुजरात सरकार ने भ्रष्ट कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य का लांच रिश्वत ब्यूरो को सशक्त करने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। इसी का परिणाम निकला कि रिश्वत लेने के नाम पर अधिकारियों-कर्मचारियों की रूह कांपने लगी। कार्रवाई का यह सिलसिला प्रत्येक दिन होता है, जब राज्य के किसी ना किसी हिस्से से रिश्वत लेने के आरोप में अधिकारी-कर्मचारी धरे जाते हैं। बहरहाल विकास की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। गुजरात ने जिस तरह से पूंजी निवेश करवाने में देश में अग्रणी स्थान पाया है और भारतीय रिर्जव बैंक ने भी इस बात को स्वीकार किया कि पूंजी निवेश में गुजरात अव्वल है। पूंजी निवेश के कारण राज्य में बडे-बडे प्रोजेक्ट आने से यह रोजगार प्राप्ति का केंद्र जैसा बनने की दिशा में सतत् गतिशील हुआ है। आनेवाले दिनों में गुजरात देश के अग्रणी राज्य में शुमार हो जाये तो यह किसी को आश्चर्य की बात नहीं लगेगी। बहरहाल राज्य की जनता की उद्यमशीलता को अवसर देकर उसका भरपूर उपयोग राज्य के विकास कार्य में करवाने में सरकार ने सफलता हासिल की है, ऐसा कहा जाये तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी।

-बिनोद पाण्डेय
(नवोत्थान लेख सेवा हिन्दुस्थान समाचार)

2 comments:

Udan Tashtari said...

अच्छा रहा यह उदगार पढ़ना.

अनूप भार्गव said...

नरेन्द्र मोदी जी के व्यक्तित्व और प्रशासन के यदि सभी पहलुओं पर विचार होता तो लेख अधिक मायने रखता ।