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Wednesday, 19 September, 2007

तो हटा दो गांधी जी की समाधि से 'हे राम!' - तोगड़िया

-डा. प्रवीण भाई तोगड़िया, अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद

'अगर राम थे ही नहीं तो महात्मा गांधी की समाधि पर अंकित 'हे राम!' हटा दो। माकपा के महासचिव येचुरी अपने नाम से 'सीताराम' हटा दें।' विश्व हिन्दू परिषद् के अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री डा. प्रवीण भाई तोगड़िया ने केन्द्र सरकार के शपथ पत्र पर क्रुध्द होते हुए यह कहा।

उन्होंने कहा कि शपथ पत्र दाखिल होने के एक दिन बाद ही देश के 5 हजार से अधिक स्थानों पर चक्का जाम से भयभीत होकर ही केन्द्र सरकार ने वह शपथ पत्र वापस लिया है। 12 सितम्बर को देशव्यापी चक्का जाम के बाद सांयकाल नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में डा. तोगड़िया ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रात: 8 बजे से 11 बजे तक ही चक्का जाम रखा गया। चूंकि रामसेतु को तोड़ने का हम विरोध कर रहे हैं इसलिए नगरों के प्रमुख सेतुओं को ही प्रदर्शन के लिए चुना गया था। इसके साथ ही प्रमुख राजमार्गों पर भी चक्का जाम किया गया। देश में 4716 स्थानों पर प्रमुख रूप से चक्का जाम किया गया। कुल मिलाकर 3 हजार स्थानों पर बड़े प्रदर्शन हुए। 626 राष्ट्रीय राजमार्गों को यातायात के लिए बंद कर दिया गया। कुल मिलाकर 9 लाख 53 हजार 61 कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। यह पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। हमने चिकित्सा वाहन (एम्बुलेंस), अग्निशमन वाहन और पुलिस के वाहनों को 'चक्का जाम' से मुक्त रखा था, इस निर्देश का कार्यकर्ताओं ने कड़ाई से पालन किया। कहीं भी कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन नहीं किया बल्कि पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने पर वे जमीन पर बैठकर, लेटकर केवल राम नाम संकीर्तन करते रहे। कुल मिलाकर एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को इस दौरान गिरफ्तार किया गया। तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश और नागपुर को छोड़कर बाकी स्थानों पर कार्यकर्ताओं को 12 बजे के बाद ही छोड़ दिया गया था।

डा. तोगड़िया ने कहा कि यह हमारा शांतिपूर्ण आंदोलन था। पर केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर हिन्दू समाज का जो उपहास किया है, वह उत्तेजित करने वाला है। इस कारण भविष्य में प्रदर्शन उग्रतर होते जाएंगे और इसकी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि जो लोग हिन्दुओं के आराध्य श्रीराम के अस्तित्व के बारे में प्रमाण मांग रहे हैं वे पहले इस्लाम और ईसाईयत के पैगम्बरों के बारे में प्रमाण प्रस्तुत करें। दरअसल यह सरकार चुनाव नजदीक देख वोट बैंक की राजनीति के कारण राम और रामसेतु के अस्तित्व को नकार रही है। इसलिए आंदोलन के अगले चरण में 27 सितम्बर से 15 अक्तूबर तक प्रत्येक गांव और शहर के प्रत्येक मोहल्लों में रामायण और श्री रामेश्वरम् मंदिर की पूजा का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। डा. तोगड़िया ने कहा कि रामसेतु की रक्षा का विषय श्रध्दा के साथ विकास से भी जुड़ा है। इस सेतु के टूटने से 4 लाख मछुआरे बेरोजगार हो जाएंगे, 4 लाख से अधिक समुद्री जीव मारे जाएंगे, भविष्य की बिजली के स्रोत थोरियम का भंडार नष्ट हो जाएगा, सुनामी से नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा। इसके बावजूद केन्द्र सरकार आंख मूंदकर अमरीका के दिखाए रास्ते पर चल रही है। दरअसल परमाणु संधि और रामसेतु का ध्वंस कहीं न कहीं आपस में जुड़े हैं। अमरीका नहीं चाहता कि भारत के पास थोरियम का भंडार रहे। इसका प्रमाण यह भी है कि तमिलनाडु के समुद्र तटों से थोरियम युक्त रेत की चोरी करके अमरीका भेजने वाले गिरफ्तार हुए हैं। डा. तोगड़िया ने कहा कि किसी अन्य मजहब के लोग भी हमारे इस आंदोलन के विरोधी नहीं हैं, बल्कि तमिलनाडु के मुस्लिम और ईसाई मछुआरे भी हमारे साथ है। हम इस आंदोलन का राजनीतिकरण कतई नहीं होने देंगे। प्रस्तुति: जितेन्द्र तिवारी

3 comments:

संजय बेंगाणी said...

मुद्दे का राजनीतिकरण न हो तो अच्छा है.

आदिविद्रोही said...

गाँधी ने हे राम कहा था, जयश्री राम नहीं.

Neeraj नीरज نیرج said...

नफ़रता बीजेपी से की जा सकती है लेकिन हिन्दुओं से क्या करना?
हे राम कहे या राम राम या जय श्री राम..
प्रेम से कहो सब भाई. ईश्वर अल्लाह तेरो नाम..
सबको सन्मति दे भगवान..

अब ये मत पूछना कि ईश्वर और अल्लाह का सुबूत भी मैं ही दूं.. बख्शो भई मुझे.