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Thursday, 27 September, 2007

सुषमा स्वराज पहली महिला सर्वश्रेष्ठ सांसद


भारतीय जनता पार्टी की प्रखर नेता व राज्यसभा सदस्य सुषमा स्वराज उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार पाने वाली देश की पहली महिला सांसद बन गई हैं। गत 13 सितम्बर को संसद के केन्द्रीय कक्ष में सम्पन्न एक गरिमामय कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता राज्यसभा सांसद श्रीमती सुषमा स्वराज को वर्ष 2004 हेतु उत्कृष्ट सांसद सम्मान से अलंकृत किया।

राष्ट्रपति श्रीमती पाटिल ने श्रीमती सुषमा स्वराज की प्रशंसा करते हुए उन्हें राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों की प्रखर वक्ता बताया। इस मौके पर सुषमा ने इस पुरस्कार के लिए पहली बार किसी महिला को चुनने के लिए चयन समिति को धन्यवाद दिया और कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि उन्हें यह पुरस्कार देश की पहली महिला राष्ट्रपति के हाथों मिला है। उन्होंने कहा] मेरा कद तो छोटा था। सहयोगियों ने यह पुरस्कार देकर मेरे कद को बड़ा कर दिया है। साथ ही उन्होंने ईश्वर से इस पुरस्कार की मर्यादा को बनाए रखने की शक्ति प्रदान करने की कामना की और वचन दिया कि वह हर संभव प्रयास कर इस पुरस्कार का मान सम्मान बनाए रखेंगी।

श्रीमती स्वराज को अर्पित प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष में रहते हुए सांसद के रूप में प्रशंसनीय भूमिका निभायी है। यहां प्रस्तुत है श्रीमती सुषमा स्वराज को अर्पित प्रशस्ति पत्र का मूल पाठ-


प्रशस्ति-पत्र
श्रीमती सुषमा स्वराज का तीन दशकों से अधिक का उत्कृष्ट सार्वजनिक जीवन रहा है। उन्हें हरियाणा सरकार में सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री तथा दिल्ली की प्रथम महिला मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त है। एक प्रतिभाशाली वक्ता होने के साथ-साथ उन्होंने देश में संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में विशिष्ट योगदान दिया है।

श्रीमती सुषमा स्वराज बारी-बारी से लोक सभा तथा राज्य सभा की सदस्य रही हैं और उन्होंने सत्ता पक्ष तथा विपक्ष में रहते हुए बखूबी प्रशंसनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने संसदीय मंच का उपयोग लोगों के सरोकारों को प्रभावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करने में किया है। सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सदस्य के रूप में नियमों तथा आचार सम्बंधी मानदंडों का कड़ाई से पालन करते हुए उन्होंने सदैव संसदीय संस्थाओं की गरिमा कायम रखी है। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उन्होंने सभा में सार्थक तथा उद्देश्यपूर्ण वाद-विवाद सुनिश्चित किया। सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में दूरगामी परिणामों वाली नीतियां लागू करने का श्रेय भी उन्हें जाता है। संसद के कार्यकरण की उनकी गहरी समझ] देश के समक्ष मुद्दों के प्रति उनके वास्तविक सरोकार तथा उनकी तीक्ष्ण बुध्दि एवं विचारों को प्रभावपूर्ण ढंग से व्यक्त करने की उनकी शैली ने दोनों सभाओं में वाद-विवाद को जीवंतता प्रदान की है। लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रबल समर्थक होते हुए उन्होंने संसद की गरिमा तथा मर्यादा को कायम रखने का सजग और सतत प्रयास किया है।

श्रीमती सुषमा स्वराज ने देश की अनेक वर्षों की सेवा के दौरान चुनौतियों का डटकर सामना किया है। सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी संवेदनशीलता तथार् कत्तव्यों के प्रति उनकी निष्ठा को सभी ने सराहा है। संघर्ष की उनकी अदम्य क्षमता तथा उनके अटूट विश्वास ने उन्हें भारत के लोक जीवन में उनकी एक विशिष्ट नेता के रूप में पहचान बनाई है।

सार्वजनिक जीवन में विभिन्न क्षमताओं में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए भारतीय संसदीय ग्रुप द्वारा श्रीमती सुषमा स्वराज को उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार 2004 से सम्मानित किया जाना सर्वथा उचित है।

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